मेरठ के एक दवा कारोबारी से रिश्वत लेते ड्रग इंस्पेक्टर को विजिलेंस की टीम ने दबोच लिया। ड्रग इंस्पेक्टर के पास से रिश्वत में ली गई रकम भी बरामद हुई है। टीम डीआई को गिरफ्तार कर सिविल लाइन थाने ले आई। यहां पुलिस और विजिलेंस टीम ने डीआई से घंटों पूछताछ करने के साथ कागजी कार्रवाई पूरी की। देर शाम डीआई के खिलाफ थाने में संबंधित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराया गया।
बताया गया है कि मेरठ के शास्त्रीनगर निवासी सुबोध कुमार ने करीब नौ माह पहले होलसेल दवा कारोबार के लाइसेंस के लिए अप्लाई किया था। फाइल को आगे बढ़ाने के नाम पर सुबोध से लगातार पैसों की डिमांड की जा रही थी। लाइसेंस देने की एवज में पहले सौदा 1.30 लाख रुपये में हुआ। लेकिन, नवंबर में नोटबंदी के चलते मामला फंस गया। इसके बाद ड्रग इंस्पेक्टर राजेश कुमार यादव और सुबोध के बीच एक लाख रुपये पर डील हुई।
सुबोध कुमार शुक्रवार को ड्रग इंस्पेक्टर राजेश कुमार यादव को तय रकम में से पचास हजार रुपये देने आया था। जैसे ही सुबोध ने रकम ड्रग इंस्पेक्टर को दी, तुरंत ही विजिलेंस टीम सीओ राजकुमार सिंह, इंस्पेक्टर एसपी त्यागी, पीके त्यागी, ब्रिजेश त्यागी, महिला इंस्पेक्टर पुष्पा गर्ग, सिपाही रविंद्र, नीतू ने दबोच लिया। हड़बड़ाहट में ड्रग इंस्पेक्टर ने खतौली के दवा व्यापारी सुभाष को रिश्वत में लिए रुपये थमा दिए।
टीम ने मौके से पचास हजार रुपये बरामद किए हैं। इस पर टीम ड्रग इंस्पेक्टर और सुभाष को गिरफ्तार सिविल लाइन थाने ले आई। यहां पर दोनों लोगों से पूछताछ की गई। थाने पर घंटों तक दोनों से पूछताछ की गई। देर शाम को विजिलेंस टीम की ओर से ड्रग इंस्पेक्टर राजेश कुमार यादव के विरुद्ध भ्रष्टाचार समेत संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली
विजिलेंस की टीम द्वारा ड्रग इंस्पेक्टर को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार करने से कचहरी में दिन भर खलबली रही। अधिकारियों और कर्मचारियों में मामले को लेकर चर्चा बनी रही। वहीं, ड्रग इंस्पेक्टर कार्यालय के कर्मचारी स्थिति को देखकर गायब हो गए।