घासीपुरा में बुधवार रात बदमाश पुलिस के सामने थे। आखिर क्यों पुलिस मुठभेड़ से ठिठक गई। अधिकांश मामलों में देखा गया है कि चंगुल में फंसे बदमाशों को ढेर करने का श्रेय लेने के लिए पुलिसवालों में होड़ मचती थी। पूर्व एसएसपी आशुतोष पांडेय और नवनीत सिकेरा के कार्यकाल में बदमाशों की मुठभेड़ का जिले में इतिहास रहा है।
मंसूरपुर कोतवाली के गांव घासीपुरा में बदमाश घर के अंदर थे और बाहर पुलिस का घेरा था। टारगेट पर बदमाश थे, फिर भी खाकी ने अपने कदमों को पीछे रखा। सवाल यह है कि शातिर बदमाशों को मारने के लिए पुलिस ने कोई फायरिंग क्यों नहीं की। खुद अफसरों का कहना है कि बदमाश खुद की गोली से ही मर गए। एक वक्त वह भी था, जब पब्लिक के हाथों मारे गए बदमाशों को मुठभेड़ दिखाने का श्रेय पुलिस को खुद ले लेती थी।
घासीपुरा में मारे गए दो युवकों की पहचान भी बदमाशों के तौर पर हुई है। मुजफ्फरनगर और शामली में पुलिस मुठभेड़ों का लंबा इतिहास रहा है। सूबे में यह अकेला जिला है, जहां पिछले 16 सालों में 200 से ज्यादा बदमाश पुलिस मुठभेड़ में ढेर किए गए हैं। पूर्व एसएसपी आशुतोष पांडेय ने दो साल के कार्यकाल में 98 बदमाशों को मार गिराया था।
ऐसा ही नजारा तब दिखा, जब एसएसपी के पद पर नवनीत सिकेरा ने चार्ज लिया। नीटू कैल गिरोह द्वारा सरकारी असलहे लूटने और अपहरण की वारदातों को अंजाम देने के बाद सिकेरा ने बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया। सिकेरा के कार्यकाल में 54 बदमाश एनकाउंटर में मारे गए थे।
लिखा-पढ़ी में बीस घंटे तक माथापच्ची
घासीपुरा वारदात के बाद पुलिस किसी भी तरह का रिस्क लेनेे के मूड में नहीं है। फोरेंसिक टीम ने गहनता से जांच की और पुलिस के तजुर्बेकार दरोगा लिख ापढ़ी की बारीकियों को पकड़ने में लगे रहे। पुलिस ने पूरी प्रक्रिया इस तरह अपनाई ताकि बाद में पुलिस के दामन पर कोई आंच न आए।
घासीपुरा में वारदात के बाद पुलिस ने फूंक-फूंककर कदम रखे। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई। मेरठ से बुलाई गई फोरेंसिक टीम ने मारे गए युवकों के फिंगर प्रिंट लिए। मकान के हर कोने की जांच की गई। फर्श पर पड़े खून और मिट्टी के नमूने लिए। बीते 20 घंटे से पुलिस के कई एसओ और दरोगा लिखा पढ़ी की माथापच्ची में जुटे हैं। खतौली एसडीएम ने भी मौके का निरीक्षण किया।
हत्या और हमले का मामला दर्ज
मंसूरपुर। पोस्टमार्टम के बाद देर रात पुलिस ने मारे गए युवकों केे विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया है। कोतवाल अमरेश कुमार बघेल ने बताया कि मृतक सचिन, गौरव और दीपक के विरुद्ध धारा 302, 307 और आर्म्स एक्ट में मुकदमा पंजीकृत कराया गया है।