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सलाखों के पीछे ले गई कॉल डिटेल, जांच के बाद कसा शिकंजा 

Wed, 01 Mar 2017 11:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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महिमा विश्वकर्मा सुसाइड केस में कॉल डिटेल ने आरोपी युधिष्ठिर को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। क्राइम ब्रांच की विवेचना में कानून के शिकंजे में आए आरोपी का सियासी रसूख भी काम नहीं आया। युधिष्ठिर पर लखनऊ में मृतका के पिता देवप्रकाश, भाई अक्षय और उसके दोस्त अरुण गुर्जर को बंधक बनाने, उत्पीड़न करने और मां संजू देवी एवं बेटी महिमा को फोन से कई बार धमकी देने का आरोप है।              
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पीड़ित पक्ष के बयानों के बाद क्राइम ब्रांच ने सीडीआर में मुख्य आरोपी युधिष्ठिर की कॉल डिटेल खंगाली तो मामले में उसकी भूमिका सामने आई। झांसी मंडल के ललितपुर जिले के थाना ताल बेहट स्थित माता टिल्ला डैम पर मछली उत्पादन का ब्लू रिवोल्यूशन कंपनी का ठेका है। मृतका का पिता देवप्रकाश यहीं एक साल से सुपरवाइजर था। सात फरवरी को लखनऊ की दुबग्गा मंडी से वह मछली बिक्री का साढ़े चार लाख रुपयों का भुगतान लेकर झांसी जा रहा था।

रास्ते में जहरखुरानी गिरोह ने कैश उड़ा लिया। आरोपी युधिष्ठिर माता टिल्ला डैम पर मैनेजर हैं। कंपनी का कैश लुटने के बाद दस फरवरी को लखनऊ में ब्लू रिवोल्यूशन कंपनी के पार्टनर लच्छेड़ा निवासी विनोद की ओर से एसएसपी लखनऊ मंजिल सैनी को सुपरवाइजर देवप्रकाश की गुमशुदगी की तहरीर दी गई थी। हालांकि पुलिस ने लखनऊ में कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया था। आरोपी ने दबंगई  से पीड़ित परिवार से पैसा वसूलना चाहा।
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देव प्रकाश, उसके बेटे अक्षय तथा अरुण गुर्जर को 12 फरवरी को लखनऊ में बंधक बनाकर तथाकथित क्राइम ब्रांच से उनकी पिटाई कराई गई। आहत महिमा ने जिंदगी खत्म कर ली। फोन पर रकम की वसूली के लिए रिश्तेदारों तक को नहीं बख्शा गया। चाहे अक्षय का दोस्त अरुण हो या फिर मामा जानीखुर्द मेरठ निवासी ऋषिपाल, उनके फोन पर भी आरोपी ने धमकी दी थी। क्राइम ब्रांच की जांच में युधिष्ठिर की कॉल डिटेल ने ही उसे सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस कॉल डिटेल और बयानों के आधार पर अन्य आरोपियों की भी मामले में भूमिका तय करेगी।             

पहलवान जी, हमें छोड़ दो.......            
मुजफ्फरनगर। पहलवान जी, हमें छोड़ दो। मृतका के भाई अक्षय के दोस्त अरुण गुर्जर ने लखनऊ में कई बार आरोपी युधिष्ठिर से यही गुहार लगाई थी। बंधकों के कब्जे से भागने के बाद अपने बयान में उसने यह बताया है। अरुण के मुताबिक आरोपी ने एक नहीं सुनी। कहा कि लूटी गई रकम तो तुम्हें ही देनी पड़ेगी। 12 फरवरी की रात लखनऊ की पन्नालाल धर्मशाला से खौफजदा अरुण आरोपियों के शिकंजे से भागकर अगले दिन देहरादून पहुंचा। क्राइम ब्रांच ने उसके बयानों को अहम माना है।             
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