आसाराम प्रकरण में पुलिस की गिरफ्त में आया शूटर कार्तिक हलदार अखिल गुप्ता और वर्षा को आश्रम में रहते हुए जानता था, जबकि यह दोनों उसे नहीं जानते थे। हत्या करवाने और उसकी योजना बनाने में शामिल रही साधकों की टीम को अखिल की पहचान कार्तिक को करवाने में परेशानी नहीं उठानी पड़ी। गुप्ता की पहचान कराने से हलदार ने खुद ही मना कर दिया था।
अहमदाबाद के चांदखेड़ा में पीड़िता की ओर से आसाराम के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज होते ही उसके चेलों ने मामले को खत्म करने और पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाने के लिए ताना-बाना बुनना शुुरू कर दिया था। मामला सुर्खियों में आते ही और पीड़ित पक्ष को अखिल और अन्य गवाह मिलते ही आसाराम के साधकों को इस मामले में कठिनाइयों को सामना करना पड़ रहा था।
उधर बापू जेल से ही जोधपुर निवासी अपने साधक को हर हाल में मामले से उसे बचाने के लिए कुछ भी करने के लिए दबाव बना रहा था। सूरत और अहमदाबाद के आश्रमों में गवाहों को मारने की योजना बनाई जाने लगी। कार्तिक को हत्याएं करने के लिए तैयार किया गया। सभी गवाहों पर हमला करने की योजनाएं बनाई गई। कार्तिक हलदार को टारगेट बनाए गए गवाहों को दिखाया जाने लगा।
हत्यारे के सामने जब अखिल को दिखाने की बात आई तो उसने साफ कहा कि अखिल को उसे दिखाने की जरुरत नहीं है। आश्रम में अखिल बापू का रसोइया होने के चलते वह उसे जानता है और वर्षा को उसकी पत्नी और आश्रम मेें काम करने के दौरान जानता था।
हत्या को अंजाम देने के लिए शहर में रहने के दौरान भी उसने नीरज के साथ शिनाख्त पर ध्यान न देकर अन्य कामों पर ज्यादा ध्यान दिया। अन्य गवाहों पर हमला करने के दौरान कई को वह पहचानता नहीं था और कई को थोड़ा बहुत ही जानता था। वहीं दूसरी ओर अखिल गुप्ता आश्रम में कार्तिक के रहते हुए भी उसे नहीं जानता था।