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अलनूर मीट प्लांट सील, पशु कटान पर रोक, एनजीटी और प्रदूषण की जांच में फेल हुआ था प्लांट 

Tue, 13 Feb 2018 12:14 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
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अलनूर मीट फैक्ट्री में सील लगाने पहुंची पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
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देश के टॉपटेन बूचडख़ानों में शुमार अलनूर मीट एक्सपोर्ट प्लांट पर जल अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में प्लांट पर मानक पूरे नहीं पाए गए। इसके चलते प्लांट को बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं। सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड के अफसरों को साथ लेकर प्लांट को सील कर दिया।
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जानसठ रोड स्थित शेरनगर गांव में वर्ष 1992 से अलनूर मीट एक्सपोर्ट प्लांट कई एकड़ में स्थापित है। प्लांट में रोजाना 600 पशुओं (बुफेलो) के कटान की अनुमति है। यहां से प्रतिदिन 90 मीट्रिक टन मांस का निर्यात किया जाता है। बीते दिनों प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक प्लांट की शिकायत पहुंची थी।

जिसके बाद जांच की गई तो यहां पर कई खामियां मिलीं। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में प्लांट से निकलने वाला दूषित जल भूजल में पहुंचाया जाता है। यह जल पूरी तरह रि-साइकिलिंग नहीं होता है। अन्य स्तर भी कई कमियां पाई गईं। इसको लेकर एनजीटी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण, लखनऊ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मीट प्लांट पर कार्रवाई के आदेश दिए थे। सोमवार को डीएम राजीव शर्मा के निर्देश पर एसडीएम कुमार धर्मेंद्र, तहसीलदार रंजीत सिंह, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई विपुल कुमार मय फोर्स मीट प्लांट पर पहुंचे। 
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प्लांट पर जरूरी जांच करते हुए अलनूर मीट एक्सपोर्ट प्लांट को सील कर दिया है। यह कार्रवाई जल अधिनियम के नियमों के तहत की गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक वैज्ञानिक डॉ डीसी पांडेय, जेई विपुल कुमार ने बताया कि मीट प्लांट की शिकायत थी, इसके लिए एनजीटी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश थे,

उन्हीं के आधार पर कार्रवाई की गई है। फिलहाल प्लांट में रखे मांस को निर्यात किया जा सकेगा। हालांकि अग्रिम आदेशों तक पशु कटान पर रोक लगाई गई है, ऐसे में प्लांट को बड़ा झटका लगा है। यह प्लांट देश में टॉपटेन मीट एक्सपोर्ट में शामिल है। प्रतिदिन 600 पशुओं (केवल बुफेलो) का कटान हो सकता है। मीट उत्पादन में प्रतिदिन 90 मीट्रिक टन मांस का निर्यात होता है। 

देश में मीट सप्लाई में चौथा नंबर 
पशु कटान के लिए बड़े पैमाने पर स्लाटिंग का लाइसेंस है। अपेडा से अलनूर प्लांट का (एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी) के नाम से पंजीकरण है। प्लांट में पार्टनर के रूप में अजय सूद और साइंस बैचलर सुनील सूद दर्शाए गए हैं। मीट सप्लाई करने में यह प्लांट भारत में चौथे पायदान पर है, जो दुनियाभर के 35 देशों में मीट सप्लाई करता है। यहां से अफ्रीका, यूएसए समेत अन्य देश शामिल है, जिन्हें मीट एक्सपोर्ट किया जाता है। बताया गया है कि कंपनी का वार्षिक टर्नओवर करोड़ों रुपये में है। 

निराना के लोगों ने की थी शिकायत 
मीट प्लांट के निकट बसे गांव निराना की प्रदूषण नियंत्रण संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री के साथ डीएम को शिकायत भेजी थी। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी विवेक रॉय ने बताया कि निराना के लोगों ने दूषित पानी व प्रदूषण फैलने से आंख खराब होने के अलावा कैंसर जैसी बीमारियां पैदा होना बताया था। इसके चलते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गांव के आसपास बनी अलनूर समेत करीब आधा दर्जन इंडस्ट्रियों को नोटिस भेजा था। 

2017 में पड़ा था प्रशासन का छापा 
प्रदेश में सत्ता बदलते ही अलनूर मीट प्लांट पर 24 मार्च 2017 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, श्रम विभाग, जिला पंचायत, परिवहन विभाग, फूड विभाग समेत कई विभागों के अधिकारियों ने मीट प्लांट का निरीक्षण किया था। 
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