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बेचैनी से कटी रात, गुमसुम रहे मुजरिम

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कवाल कांड में उम्रकैद की सजा के बाद बैरक बदली
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मुजफ्फरनगर। कवाल के दोहरे हत्याकांड में उम्र कैद की सजा पाए छह मुजरिमों की रात बेचैनी से कटी। फैसले के बाद से उन पर हताशा हावी है और सभी दिन भर गुमसुम रहे। 27 अगस्त, 2013 में कवाल में हुई सचिन और गौरव की हत्या के बाद से ही पांच मुजरिमों को जमानत तक नहीं मिल पाई थी। एडीजे कोर्ट सप्तम से उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मुजस्सिम, फुरकान, जहांगीर, नदीम, अफजाल और इकबाल बैरक में शुक्रवार की रात बेचैन घूमते रहे। सजा से हुई हताशा उनके चेहरे पर दिखाई दी। शनिवार को उन्हें अलग-अलग बैरकों में भेजा गया। दिनभर सभी गुमसुुम रहे। जेल के दूसरे बंदियों से कम ही बात की। मुजरिमों के व्यवहार में भी सजा का असर दिख रहा है। जेल अधीक्षक एके सक्सेना ने बताया कि जिला कारागार में उक्त कैदी अब सजायाफ्ता है, उन्हें कारागार नियमों के मुताबिक अलग बैरकों में शिफ्ट किया जाएगा। शासन के आदेश के बाद आगरा या नोएडा जेल भी भेजा जा सकता है। बताते चले कि दोहरे हत्याकांड का एक मुजरिम मुजम्मिल बुलंदशहर जेल में है।
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