मीरापुर (मुजफ्फरनगर)। गांव कुतुबपुर में पुरानी रंजिश के चलते दो पक्षों में हुई मारपीट हो गई। मामले में पुलिस ने एक महिला समेत पांच लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की है।
मीरापुर इंस्पेक्टर अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि छह दिसंबर को गांव कुतुबपुर में दो पक्षों में मारपीट के साथ एक महिला से छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पीड़िता का आरोप है कि गांव के शीशपाल पुत्र मणिराम तथा पप्पू पुत्र समयसिंह आदि ने उसके घर में घुसकर उससे छेड़छाड़ की और विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की। उधर, दूसरे पक्ष का आरेाप है कि सुनील, कबूल आदि ने उसके साथ मारपीट कर उसे घायल कर दिया। पुलिस ने दोनों पक्षों की रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी। मामला पुरानी रंजिश के कारण हुआ बताया गया है।
कड़ाके की ठंड में अलाव जलाए
मीरापुर (मुजफ्फरनगर)। कड़ाके की ठंड के चलते नगर पंचायत अध्यक्ष तंजीला बेगम ने कस्बे में एक दर्जन स्थानों पर अलाव जलवाने की व्यवस्था की है। उल्लेखनीय है कि शीतलहर के कारण जनजीवन प्रभावित है। सूर्यास्त के साथ ही बाजार की रौनक कम हो जाती है और लोग अपने घरों में रहने को बाध्य हो रहे हैं। कड़ाके की ठंड के कारण प्रात: घूमने वालों की संख्या नगन्य हो गई है।
भागवत कथा से कल्याण संभव
मीरापुर (मुजफ्फरनगर)। श्री बालाजी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के व्यास पंडित खेमचंद कौशिक ने कहा कि भगवान की लीलाओं में गूढ़ रहस्य छिपे हैं। इनको समझने के लिए भागवत कथा का श्रवण जरूरी है।
उन्होंने चीरहरण लीला को समझाते हुए कहा कि भगवान ने चीरहरण के माध्यम से गोपियों के अज्ञान को दूर किया था। कथा व्यास ने पुतना द्वारा आसुरों का वध, ब्रज में भगवान की बाल लीलाओं, माखन चोरी, मृदा भक्षण, मटकी फोड़, गौचारण लीला, वनभोज, कंदुक क्रीड़ा, कालियानाग लीला, दावानल पान लीला, चीर हरण के साथ गोवर्धन पूजा के माध्यम से इंद्र के अहंकार को नष्ट करने की लीला को विस्तार से समझाया। कहा कि भगवान की सभी लीलाएं रहस्यमयी हैं। इनको जानने के लिए भागवत कथा का श्रवण आवश्यक है। मनुष्य को गुरुवचनों को श्रद्धा एवं विश्वास के साथ ग्रहण करना चाहिए। भगवान में आस्था रखने से ही व्यक्ति भगवान के अस्तित्व को समझा सकता है। कथा के अंत में भगवान गोवर्धन की विशेष पूजा-अर्चना के साथ 56 प्रकार के भोग अर्पित किए गए। कथा व्यवस्था में महंत राजपाल सुक्रालिया, बिजेंद्र प्रजापित, मनोज वाजपेयी, संजय राय, सचिन पाल, वासुदेव शर्मा, जगमोहन, विनोद कुमार, ऋषिपाल, सरदार जगमोहन, धर्मवती, प्रमिला शर्मा, प्रतिभा माहेश्वरी, अंजू रानी, प्रीति आदि सक्रिय रहे। महिलाओं ने कथा श्रवण के दौरान भगवान के प्रसंगों को सुनकर भाव-विभोर होकर जमकर नृत्य किया।