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अपहरण के झूठे मामले में जेल गए चारों आरोपी हुए रिहा

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अपहरण के झूठे मामले में जेल गए चारों आरोपी रिहा
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मीरापुर। गांव भुम्मा निवासी रियासत के कथित अपहरण के चारों निर्दोष आरोपी न्यायालय के आदेश पर जेल से रिहा होकर अपने घर पहुंच गए। छह दिन की जेल की यातनाएं झेलकर कर वापस आए लोगों ने अपहरण की झूठी रिपोर्ट लिखाने वालों के विरुद्ध तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
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दस अक्तूबर को गांव भुम्मा निवासी रियासत पुत्र मंगता अपने घर से मजदूरी करने के लिये मवाना के एक गांव में चला गया था। रियासत के भाई हसरत ने दलित समाज के चार लोग पाल्ले, नरेश, भोपाल व राजवीर को नामजद करते हुए अपहरण की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने चारों बुजुर्ग आरोपियों को 17 अक्तूबर को जेल भेज दिया था। 21 अक्तूबर को कथित रूप से अपह्त रियासत पुलिस को मिल गया था। रियासत ने न्यायालय में बयान देकर अपने अपहरण की कहानी को झूठा बताया और कहा कि वह कर्ज में दबने के कारण गांव से चला गया था। रियासत के बयान के आधार पर पुलिस ने 22 अक्तूबर की रात को चारों आरोपियों को रिहा कराने की कार्रवाई कर जेल अधिकारियों को रिहाई का पत्र दे दिया था। रात्रि होने के कारण चारों आरोपी एक रात और जेल में रहे। मंगलवार को मीरापुर पुलिस सुबह 8 बजे जिला कारागार पहुंची और चारों आरोपियों को लाकर गांव भुम्मा में उनके परिजनों को सौंप दिया। पीडित परिवारों ने पुलिस से झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने के मुख्य आरोपी हसरत व रिपोर्ट में दर्शाये गये गवाहों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की मांग की है। उधर ,विवेचक एसएसआई जितेेंद्र यादव ने बताया कि रियासत के बयान के आधार पर 182 सीआरपीसी की कार्यवाही शुुरू कर दी गई है और जल्द ही झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वाले जेल भेजे जाएंगे। उधर, भुम्मा में तनावपूर्ण शांति है। शांति व्यवस्था के मद्देनजर मीरापुर पुलिस के साथ रामराज, जानसठ व ककरौली की पुलिस गांव में तैनात है। सीओ जानसठ सोमेन्द्र कुमार नेगी लगातार स्थिति पर नजर रखे हैं। पीड़ित परिवारों व गांव के दलित समाज ने चारो लोगों की जेल से वापसी पर संतोष व्यक्त किय है।
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