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जय भीम बोलने पर शोधाथी का एडमिशन रोका

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जय भीम बोलने पर शोधार्थी का एडमिशन रोका
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मुजफ्फरनगर। बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर की जयंती पर जय भीम बोलने पर शहर के एक शोधार्थी छात्र का जेएनयू ने एडमिशन रोक दिया है। बीते साल के मामले में कार्रवाई करते हुए जेएनयू के चीफ प्राक्टर ने दस हजार का जुर्माना भी लगा दिया है। साइंस पॉलिसी में पीचडी कर रहे सन्नी धीमान जेएनयू में वर्ष 2016 में छात्र संघ अध्यक्ष का चुनाव भी लड़ चुका है।
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शहर के प्रकाश चौक निवासी सन्नी धीमान दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय में साइंस पॉलिसी में पीएचडी के छात्र हैं। उसने वर्ष 2013 में जेएनयू में प्रवेश लिया था। झेलम हॉस्टल के रूम नंबर 209 में रह रहे शोधार्थी का यह चौथा साल है। छात्र राजनीति में सक्रिय सन्नी ने दो साल पहले जेएनयू में अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था। मंगलवार को वह शैक्षणिक सत्र में प्रवेश के लिए जेएनयू के प्रशासनिक भवन पहुंचा, जहां उसे अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश थमा दिया गया। 16 जुलाई, 2018 के जेएनयू चीफ प्राक्टर के आदेश की प्रति में 14 अप्रैल, 2017 की घटना का जिक्र किया गया है। जेएनयू सेंट्रल लाइब्रेरी में डॉ भीमराव आंबेडकर जयंती पर हुए कार्यक्रम में सन्नी धीमान ने अपनी बात रखने के बाद जय भीम का नारा लगा दिया था। उसी संदर्भ में जेएनयू ने जांच के बाद उन पर दस हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए एडमिशन रोक दिया है। जेएनयू की कार्रवाई से आहत शोधार्थी सन्नी धीमान का कहना है कि लाइब्रेरी भवन का नाम बाबा साहब के नाम पर रख दिया गया, मगर जेएनयू में एससी और ओबीसी छात्र-छात्राओं की सीटें कम कर दी गई है। इस मुद्दे को उठाने की वजह से उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। जय भीम का नारा देकर उसने कोई अपराध नहीं किया है। दस हजार रुपये का जुर्माना उत्पीड़न नहीं तो क्या है? छह माह की फीस मात्र 180 रुपये हैं। जेएनयू प्रशासन ने जुर्माना अदा न करने पर पीएचडी के चौथे वर्ष में प्रवेश से इंकार कर दिया है।
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