मेडिकल स्टोर के लिए होलसेल का लाइसेंस में लगे कई के अनुभव प्रमाण-पत्र फर्जी मिले हैं। विभागीय जांच में उनका कोई रिकार्ड नहीं मिल पाया है। इसको लेकर विभाग ने कार्रवाई कर फाइलों को रोक लिया। अब अनुभव प्रमाण-पत्र फर्जी मिला तो आवेदक को फार्मेसिस्ट लगाना अनिवार्य होगा। तभी होलसेल का लाइसेंस बन सकेगा। इसकी भी विभाग गोपनीय जांच करेगा।
प्रदेश सरकार ने पहले होलसेल लाइसेंस के लिए 10 मेडिकल स्टोर की बाध्यता थी। बाद में छह और फिर तीन की गई। अब एक मेडिकल पर एक होलसेल लाइसेंस लिया जा सकता है। हालांकि होलसेल लाइसेंस लेने के लिए आवेदक को अपना अनुभव प्रमाण-पत्र देना होता है। इसके साथ सैलरी स्लिप, दवाओं के ज्ञान, हाजिरी पंजिका दिखानी होती है। विभागीय जांच में करीब 25 से 30 फाइलों में लगे अनुभव प्रमाण-पत्रों का रिकार्ड नहीं मिला है। इन्हें फर्जी माना गया है। इसके चलते इन सभी फाइलों के लाइसेंस रोक दिए गए हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि फर्जीवाड़ा कर अनुभव दिखाने वाले आवेदकों को लाइसेंस नहीं मिलेगा।
उस आवेदक को लाइसेंस के लिए फार्मेसिस्ट रखना होगा। डीआई जगबीर सिंह ने बताया कि लाइसेंस के अनुभव प्रमाण-पत्र मांगे गए हैं, इनमें फर्जीवाड़े की आशंका अधिक है। इसके चलते अब फार्मेसिस्ट रखकर आवेदक को लाइसेंस बनवाना पड़ेगा।