रामदास पर पहले भी हुआ था कई बार हमला
शाहपुर। सांप्रदायिक दंगे में नामजद रामदास उर्फ काला पर कई बार शाहपुर आते-जाते रजबहे की पटरी पर हमले भी हो चुके थे। हालांकि हर बार वह इन हमलों से बच निकलता रहा। ग्रामीणों के अनुसार लगातार हुए हमलों के बाद से रामदास ने अकेले गांव से बाहर निकलना बंद कर दिया था। यहां तक कि वह जंगल में जाने से भी बचता था। वहीं, रामदास की हत्या के बाद एक पुलिस टीम गांव पलड़ा के पास स्थित दंगा पीड़ित विस्थापितों की बस्ती में पहुंची और बाइक सवार हत्यारोपियों की तलाश करने के साथ ही दंगा पीड़ितों से इस संबंध में पूछताछ भी की। हालांकि इस संबंध में किसी तरह का सुराग पुलिस को फिलहाल नहीं मिल सका है।
नोएडा में होने के चलते मौके पर नहीं पहुंच सके सांसद
मुजफ्फरनगर/शाहपुर। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉक्टर संजीव बालियान का पैतृक गांव कुटबी है, जिससे कुटबा की सीमा पूरी तरह से लगी हुई है। हालांकि निकटवर्ती गांव में दिनदहाड़े हुई वारदात के बावजूद सांसद पीड़ित परिजनों को सांत्वना देने नहीं जा सके, क्योंकि शनिवार को ही भाजपा कार्यकारिणी की बैठक होने के चलते वे नोएडा में रहे थे।
डॉक्टरों के पैनल से रात में ही कराया गया पोस्टमार्टम
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव कुटबा में हुई दंगा आरोपी रामदास उर्फ काला की हत्या के मामले में पीड़ित परिजनों द्वारा शनिवार देर रात तक किसी तरह की तहरीर नहीं दी गई। उधर, रामदास की हत्या के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा है तथा ग्रामीण भी चुप्पी साधे हुए हैं। एहतियातन गांव में पुलिस फोर्स तैनात की गई है। वहीं, दंगारोपी की हत्या की घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस-प्रशासन द्वारा शनिवार रात में ही उसके शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है, जिसके लिए डॉक्टरों का पैनल निर्धारित किया गया है। वहीं, अफसर भी देर रात तक पोस्टमार्टम हाउस पर ही डटे हुए थे। माना जा रहा है कि पोस्टमार्टम के लिए देर रात में ही किसी समय रामदास के शव का अंतिम संस्कार किया जा सकता है। सीओ बुढ़ाना हरिराम यादव का कहना है कि रात में ही शव का पीएम कराया जा रहा है। वहीं, पीड़ित परिजनों द्वारा देर रात तक भी घटना की तहरीर नहीं दी। परिजनों द्वारा जो भी तहरीर दी जाएगी, उसी के आधार पर मामले की जांच की जाएगी। फिलहाल ग्राम प्रधान अशोक कुमार की ओर से मामला दर्ज किया गया है।