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मंगलवार को कत्ल, शुक्रवार को फैसला

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मंगलवार को हुआ था कत्ल, शुक्रवार को सजा सुनाई गई
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मुजफ्फरनगर। गांव कवाल में बाइक-साइकिल टकराने के मामूली विवाद में 27 अगस्त 2013 को मजरा मलिकपुरा के ममेरे भाइयों सचिन-गौरव की बबर्रता से की गई हत्या के मामले में गुनहगारों को उनके अंजाम तक पहुंचाने में कोर्ट को पांच साल 165 दिन का समय लगा।
कचहरी परिसर में मौजूद सचिन-गौरव के परिजन 27 अगस्त 2013 को मंगलवार के उस दिन को याद कर सुबक उठे, जब मामूली विवाद होने की बात कहकर सचिन-गौरव घर पर खाना छोड़कर परिजनों को कुछ देर में आने की बात कहकर निकले थे। हालांकि इसके बाद दोनों ममेरे-फुफेरे भाई कभी घर नहीं लौटे और उन्हें कवाल के मुख्य चौराहे के निकट ईंट-पत्थरों से कुचलकर और लाठी-डंडो व सरियों से पीटकर बेहद बर्बर तरीके से कत्ल कर दिया गया। परिजनों ने कहा, उन्हें ईश्वर पर पूरा भरोसा था कि उनके बच्चों के कातिलों को सजा जरूर मिलेगी। उक्त नृशंस हत्याकांड के पूरे पांच साल 165 दिन बाद शुक्रवार के दिन एडीजे-सप्तम कोर्ट ने सभी सातों आरोपियों मुजम्मिल-मुजस्सिम पुत्रगण नसीम अहमद, जहांगीर-नदीम पुत्रगण सलीम, अफजाल-इकबाल पुत्रगण बुंदू और फुरकान पुत्र फजला को उम्रकैद और अर्थदंड की सजा सुनाई तो कचहरी परिसर में मौजूद सचिन-गौरव के परिजनों के चेहरों पर संतोष दिखाई पड़ा।
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कचहरी परिसर में स्थित मस्जिद में की नमाज अदा
मुजफ्फरनगर। सचिन-गौरव के कत्ल में सजा सुनाए जाने के लिए दोपहर 12 बजे कोर्ट लगी। निर्धारित समय पर कोर्ट मेें सुनवाई शुरू हुई, जिसमें पहले सजा के प्रश्न पर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने दलीलें रखीं। इसके बाद कोर्ट में मुजरिमों पर लगाए जाने वाले अर्थदंड के प्रावधानों पर चर्चा हुई, जिसके बाद दोपहर करीब सवा तीन बजे मुजरिमों को सजा सुनाई गई। कानूनी प्रावधानों के तहत सजा सुनाए जाने में लगातार हो रही देरी के चलते मुजरिमों के परिजनों ने कचहरी परिसर में स्थित मस्जिद में ही जुमे की भी नमाज अदा की।
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