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दंगे में कुटबा-कुटबी के आठ लोगों की हुई थी हत्या

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दंगे में कुटबा-कुटबी के आठ लोगों की हुई थी हत्या
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मुख्य वारदात में नामजद था रामदास उर्फ काला, चार माह रहा जेल में
कुटबा के 110 नामजद व 250 अज्ञात के खिलाफ हुई थी रिपोर्ट दर्ज
मुख्य वारदात में नामजद था रामदास उर्फ काला, चार माह रहा जेल में
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। सात सितंबर 2013 को हुए सांप्रदायिक दंगे के दौरान हिंसा का सबसे भयावह कांड शाहपुर क्षेत्र के गांव कुटबा-कुटबी में हुआ था। पुरबालियान व जौली गंगनहर पटरी मार्ग पर नंगला मंदौड़ की महापंचायत से लौटते ग्रामीणों पर हमले से भड़के गुस्से की परिणति कुटबा-कुटबी के एक समुदाय के आठ लोगों की हत्या के रूप में हुई। इनमें से सात लोगों की लाशें गांव में मिलीं। एक का शव गांव के बाहर नहर में पड़ी मिली थी। आठ लोगों की सामूहिक हत्या के बाद कुटबा-कुटबी के साथ ही आसपास क्षेत्र के गांवों में भी दहशत का ऐसा गुबार उठा कि रातोरात इन गांवों से समुदाय विशेष के लोग घर-बार छोड़कर पलायन कर गए। सांप्रदायिक हिंसा की इस दहशत से मुस्लिम परिवार आज तक उबर नहीं पाए हैं, जिनके घर-बार आज तक जस के तस पड़े धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो रहे हैं।
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110 नामजद व 250 अज्ञात के खिलाफ हुई थी रिपोर्ट दर्ज
मुजफ्फरनगर। शाहपुर के गांव कुटबा-कुटबी में सांप्रदायिक दंगे के दौरान मारे गए आठ लोगों की हत्या में गांव कुटबा के 110 लोगों को नामजद करने के साथ ही करीब 250 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। गांव कुटबा में जिस रामदास की शनिवार को हत्या हुई, वह सामूहिक हत्याकांड के साथ ही आगजनी व बलवे में बतौर मुख्य आरोपी नामजद हुआ था।
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किसी भी दंगा आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई थी पुलिस
मुजफ्फरनगर। सांप्रदायिक हिंसा का भयावह रूप देखने और आरोपियों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद पुलिस इनमें से एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। बाद में क्षेत्र के गणमान्य लोगों की पहल और जनपद में भेजे गए आईपीएस आशुतोष पांडेय के प्रयासों से नामजद आरोपियों ने पुलिस को अपनी शर्तों पर गिरफ्तारी दी थी। इनमें रामदास भी शामिल था, जिसे जेल जाने के करीब चार माह बाद जमानत मिली थी। तभी से दंगे का आरोपी रामदास जमानत पर चल रहा था।
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दंगे में इन लोगों की गई थी जान
मुजफ्फरनगर। सांप्रदायिक हिंसा के दौरान गांव कुटबा-कुटबी में जिन लोगों की हत्याएं हुईं थीं। उनमें इरशाद पुत्र शमशाद, शमशाद पुत्र हबीब, वहीद पुत्र बरफू, फैय्याज पुत्र सुलेमान, तराबू पुत्र समीरा, कय्यूम पुत्र अजीज, मोमीन पुत्र यामीन और खातून पत्नी कदमदीन शामिल थे।
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सोनिया व राहुल ने भी किया था दौरा
मुजफ्फरनगर। सांप्रदायिक हिंसा के बाद दंगे की विभीषिका का जायजा लेने के लिए जहां तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दंगाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने के साथ ही दंगा पीड़ितों की बस्तियों में जाकर पलायन करने वाले मुस्लिमों का हाल-चाल जाना था। वहीं, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ ही उस समय कांग्रेस सुप्रीमो रहीं सोनिया गांधी व राहुल गांधी ने भी दंगाग्रस्त इलाकों का दौरा कर मुस्लिमों के आंसू पोंछे थे।
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