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पुलिस ने तमंचा फैक्ट्री पकड़ी

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बुढ़ाना।
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पुलिस ने हुसैनपुर कलां गांव के जंगल में छापा मारकर तमंचे बनाने की बड़ी फैैक्ट्री पकड़ी है। इस दौरान पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मौके से बने अधबने तमंचे, भारी मात्रा में तमंचों के पुर्जे तथा तमंचे बनाने के उपकरण बरामद किए।
क्राइम इंस्पेक्टर जयभगवान यादव ने बताया रविवार रात हुसैनपुर कलां गांव के जंगल में गन्ने के खेत में तमंचा बनाने की फैक्ट्री की सूचना मिली। उन्होंने पुलिस की एक टीम बनाकर जंगल में छापा मारा। पुलिस ने ग्रामीण फुलमिया की गन्ने के खेत को घेर लिया। अचानक पुलिस को देखकर तमंचे बनाने वाले युवक फायर करते हुए भाग खड़े हुए। पुलिस ने भी जवाबी फायर करते हुए मुठभेड़ के बाद तीन युवकों को दबोच लिया। पुलिस ने युवकों को साथ लेकर गन्ने के खेत में घुसी तो नजारा देखकर दंग रह गई। गन्ने के खेत में तिरपाल डालकर तमंचे बनाने का कारखाना चलाया जा रहा था। पुलिस ने मौके से आधा दर्जन बने हुए तमंचे, एक मस्कट, 315 व 312 बोर के कारतूस, एक दर्जन खोखे, भारी मात्रा में तमंचों के पुर्जे, ड्रिल मशीन, वेल्डिंग मशीन, शिकंजा सहित भारी मात्रा में अन्य उपकरण व औजार बरामद किए। ये लोग बिजली की लाइन पर कटिया डालकर बेल्डिंग मशीन व अन्य उपकरण चलाते थे। पकड़े गए
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युवकों से पूछताछ के बाद पुलिस ने बताया कि हबीब पुत्र समतुला निवासी हुुुसैनपुर कलां, शराफत पुत्र नफीस निवासी मंदवाड़ा तथा शोएब उर्फ गुड्डू पुत्र जमील शामली जनपद के कैराना कस्बे का रहने वाला है। उधर, इंस्पेक्टर जयभगवान यादव व पुलिस क्षेत्राधिकारी हरिराम यादव ने प्रेसवार्ता में बताया कि पकड़े युुवक पहले भी जेल जा चुके हैं। ये युवक तमंचे बनाकर बाहर सप्लाई करने का काम करते है। पुलिस की टीम में उपनिरीक्षक सोबीर नागर, धर्मेंद्र सिंह, हरेंद्र सिंह तथा कांस्टेबल कालूूराम व आदित्य आदि शामिल रहे।
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लागत 500, बिकता है 2000 में
तमंचे बनाने वाले युवकों ने बताया कि बनाए गए तमंचे की लागत 500 रुपये आती है और 2000 रुपये में बिकता है। बेरोजगारी के कारण मजबूरी में उन्हें इस धंधे में आना पड़ा। एक आदमी पूरे दिन में एक या दो तमंचे बना पाता है।
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