दस साल में दस की जान ले गई चुनावी रंजिश
भोपा (मुजफ्फरनगर)। जिला पंचायत चुनाव की रंजिश के चलते दस दिनों में दो हत्याएं होने से सीकरी के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कई परिवार दहशत के कारण गांव छोड़ गए और कुछ छोड़ने की तैयारी में हैं। पुलिस का इकबाल खत्म हो चुका है। पूर्व प्रधान मौहम्मद अम्मार की हत्या के बाद गांव में पीएसी तैनात की गई थी। गांव में पीएसी के रहते बेखौफ हत्यारों ने लुफ्तुर्रहमान की हत्या कर दी, जबकि बुधवार को कसीम पर फायरिंग कर तीन गोली मारकर उसे घायल कर दिया था। वहीं, सीकरी गांव खूनी रंजिशों के कारण बदनाम हो चुका है। गांव में गत दस वर्षों में अलग-अलग रंजिश के चलते दस लोगों की जान जा चुकी है।
सीकरी गांव में पूर्व प्रधान जमशेद और पूर्व प्रधान मौहम्मद अम्मार पक्ष के बीच चल रही इस खूनी रंजिश में तीन लोगों का कत्ल हो चुका है। दो साल पहले गांव के ही जमशेद, गुलसनव्वर, नौशाद आदि ने अम्मार पक्ष के खालिद को गोली मारी थी, इसके एक दिन बाद इन्हीं लोगों ने 16 अक्तूबर 2015 को खालिद के बेटे तसलीम की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या में नामजद जमशेद, गुलसनव्वर और नौशाद जेल में बंद हैं। तसलीम हत्याकांड में पूर्व प्रधान मोहम्मद अम्मार पैरवी कर रहे थे। दस दिन पहले 22 अगस्त को अम्मार इसी मुकदमे की कोर्ट में तारीख पर जा रहे थे। शहर के आर्यपुरी में बदमाशों ने उनकी गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। उसी दिन से सीकरी के ग्रामीण किसी अनहोनी और गैंगवार से सहमे हुए थे। जिसे देखते हुए गांव में पीएसी तैनात की गई थी। बावजूद दूसरे पक्ष के लोगों ने बुधवार को खेत पर काम करने गए अम्मार पक्ष के कसीम को तीन गोलियां मारकर घायल कर दिया। बृहस्पतिवार सुबह दिनदहाड़े लुफ्तुर्रहमान की हत्या कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पुलिस पीड़ित पक्ष को सुरक्षा मुहैया कराती तो लुफ्तुर्रहमान की हत्या नहीं होगी। ग्रामीणों में पुलिस के प्रति काफी आक्रोश है।
हत्या की धमकी मिल रही थी
मुजफ्फरनगर। लुफ्तुर्रहमान को लगातार फोन पर हत्या की धमकियां मिल रही थीं, मगर पुलिस ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। मृतक के भाई चांदमियां ने देर शाम भोपा थाने पहुंचे एसएसपी अनंत देव को बताया कि इसी वर्ष दो मार्च को जंगल से ताजिम का अपहरण हो गया था। जिसका मुकदमा भोपा थाने पर दर्ज है। इस मुकदमे में उसका भाई लुफ्तुर्रहमान गवाह था। जेल में बंद पूर्व प्रधान जमशेद, गुलसनव्वर, नौशाद की ओर से उसके भाई को इस मामले में गवाही न देने की लगातार धमकियां मिल रही थी। उन्होंने भोपा पुलिस को भी अवगत कराया, मगर पुलिस ने धमकियों को गंभीरता से नहीं लिया। जिसके चलते विरोधियों ने उसके भाई लुफ्तुर्रहमान की हत्या कर दी।
जंगल से बैल-बुग्गी में पहुंची लहूलुहान लाश
भोपा। बदमाशों ने जिस समय लुफ्तुर्रहमान को गोलियों का शिकार बनाया, वह अपनी बैलगाड़ी से जंगल से चारा लेकर आ रहा था। बदमाशों ने बुग्गी में ही उसे गोलियों से भून डाला। हत्या के बाद बदमाश फरार हो गए और बैल बुग्गी में पड़ी लाश को लेकर गांव आ गया। गांव में लहूलुहान शव देख अफरातफरी मच गई। लुफ्तुर्रहमान की हत्या से घर में कोहराम मच गया। चार भाइयों हिजुर्रहमान, अजीजुर्रहमान, चांद मियां में लुफ्तुर्रहमान तीसरे नंबर का था। उसकी हत्या से परिजनों में कोहराम मचा है। मृतक की पत्नी राजिया के कोई संतान नहीं हुई, जिसके कारण उसने अपने भांजे गुलबुद्दीन को गोद ले रखा है।
कई थानों की फोर्स लगाई
भोपा। लुफ्तुर्रहमान की हत्या के बाद सीकरी गांव में भारी फोर्स तैनात की गई है। भोपा सीओ मौहम्मद रिजवान, सीओ जानसठ एसकेएस प्रताप, थाना जानसठ, थाना ककरौली, एसओजी की टीम को भी हत्यारोपियों की तलाश में लगाया गया है, जबकि पिछले दस दिनों से पीएसी भी गांव में कैंप कर रही है। सीओ मोहम्मद रिजवान ने बताया कि पुलिस नामजद हत्यारोपियों की तलाश में लगातार दबिश डाल रही है।
इन लोगों की गई जान
भोपा।माल्ली, अनवर, अशरफ, यूसुफ, गुड्डू, नासीर, तसलीम, पूर्व प्रधान मौहम्मद अम्मार और लुफ्तुर्रहमान की हत्या हो चुकी हैं। इसके अलावा कई लोगों पर जानलेवा हमले भी हो चुके हैं।