मृतक के पिता धर्मवीर ने यमुना विहार निवासी महिला विमला, उसके पुत्र भोलू, राजवीर और उसका मौसी के लड़के मेरठ के थाना दौराला के गांव चिरौड़ी निवासी धर्मेद्र कुमार के खिलाफ पवित्र की हत्या कर शव को गंग नहर में डालने का मुकदमा दर्ज कराया था। हत्या का कारण मृतक का आरोपी पक्ष की युवती के साथ प्रेम-प्रसंग होना बताया था। विवेचना में पुलिस ने आरोपी महिला का नाम निकाल दिया था। लेकिन अभियोजन पक्ष ने सीआरपीसी की धारा 319 के तहत महिला को अदालत में तलब कराया था। मुकदमे के ट्रायल के दौरान आरोपी भोलू की मृत्यु हो गई थी।
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अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए। अदालत ने वारदात की दोषी विमला, राजबीर और धर्मेंद्र कुमार को धारा 302 में आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड नहीं देने पर पांच-पांच साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियुक्त राजबीर और धर्मेंद्र को अपहरण की धारा में 10-10 साल का कारावास और 20-20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।