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Muzaffarnagar News: पिछड़ों के आरक्षण पर आयोग ने किया मंथन

Mon, 16 Jan 2023 10:00 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
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- सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली के डीएम के साथ की चर्चा
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- अब से पहले दिए गए आरक्षण, रेपिड सर्वे आदि पर चर्चा की
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण के लिए गठित पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य चौब सिंह वर्मा ने सहारनपुर मंडल के तीनों जिले के डीएम और स्थानीय निकाय से जुड़े अधिकारियों की बैठक ली। साल 2017 और 2022 के रैपिड सर्वे की रिपोर्ट पर चर्चा की। निकायों में पिछड़ों के आरक्षण पर विचार किया गया। मंडल के आरक्षण पर चर्चा की गई।
उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर बने पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य चौब सिंह वर्मा ने विकास भवन में सहारनपुर मंडल के जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, वरिष्ठ प्रभारी अधिकारी नगर निकाय और अधिशासी अधिकारी के साथ निकायों में आरक्षण की स्थिति एवं रैपिड सर्वों के संबंध में समीक्षा बैठक की।
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आयोग के सदस्य ने अधिकारियों को उच्चतम न्यायालय की ओर से पिछड़ा वर्ग आरक्षण के संबंध में पारित निर्णय एवं निर्देशों के साथ पूर्व में भी पारित आदेशों के संबंध में विस्तृत रूप से जानकारी दी। सभी अधिकारियों से उनके जनपद एवं निकाय वार आरक्षण की स्थिति के बारे में जानकारी ली।
तीनों जनपदों की निकायवार वर्ष 2006, वर्ष 2012 एवं वर्ष 2017 में सम्पन्न हुए निकाय निर्वाचनों में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण की स्थिति पर विचार विमर्श किया। वर्ष 2017 और वर्ष 2022 में कराए गए अन्य पिछडा वर्ग के रैपिड सर्वे पर भी निकायवार चर्चा की गई। निकायवार आरक्षण की स्थिति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रस्तुत आंकड़ों पर संतोष व्यक्त किया और भविष्य में भी विचार-विमर्श करने के लिए कहा है। बैठक में डीएम चंद्र भूषण सिंह, डीएम सहारनपुर अखिलेश सिंह, डीएम शामली जसजीत कौर, नगर आयुक्त सहारनपुर गजल भारद्वाज, सीडीओ संदीप भागिया, तीनों जिलों के एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट अनूप सिंह मौजूद रहे।

तीनों जिलों से प्राप्त की जानकारी
आयोग सदस्य चौब सिंह वर्मा ने कहा कि मंडल की सूचना प्राप्त हो गई है, तीनों जनपदों द्वारा सर्वे इत्यादि में बेहतर कार्य किया गया है। यदि किसी भी सूचना की आवश्यकता होगी तो जनपद के जिलाधिकारियों से संपर्क किया जाएगा। सूचनाओं के संकलन एवं अध्ययन के बाद 31 मार्च तक उच्चतम न्यायालय को उपलब्ध करा दिया जाएगा।
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आरक्षण से अधिक सीटों पर जीते पिछड़े
बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि जो सीटें अनारक्षित रही हैं, उन पर भी पिछड़े वर्ग के लोग चुनाव जीतते रहे हैं। यदि कोई कस्बा किसी भी पिछड़ी जाति के बाहुल्य वाला है तो वह आरक्षण में हो या न हो वहां अधिकतम उसी जाति के चेयरमैन बनते रहे हैं। ऐसे में ओबीसी के चेयरमैन की संख्या खुद ही बढ़ जाती है। 27 प्रतिशत आरक्षण के बाद भी यहां 50 प्रतिशत से अधिक ओबीसी के चेयरमैन बनते रहे हैं।
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