मुजफ्फरनगर। किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह ने राजनीति में न कभी अपने सिद्धांत छोड़े और न ही नैतिक मूल्य। शिक्षण संस्थान खोलकर ग्रामीण अंचल में शिक्षा का अंधियारा मिटाने का काम किया। सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में अग्रणी भूमिका निभाई। किसान और मजदूरों को बच्चों की शिक्षा के लिए उन्होंने हमेशा प्रेरित किया। राजनीति में विपक्षी भी उनके कायल रहे। साथ रहने वालों को परिवार की तरह माना। लोक गीतों से उनका गहरा लगाव रहा। उनका जीवन हमेशा किसान-मजदूरों को समर्पित रहा। हमेशा जिले से उनका गहरा नाता रहा।
शिक्षा ऋषि से हमेशा रहा संवाद
वीतराग स्वामी कल्याणदेव से उनकी हार्दिक आत्मीयता हो गई थी। उनके बीच राजनीति के मुद्दों पर पत्रों के जरिये स्पष्ट संवाद होता था। शिक्षा के जरिये ग्रामोत्थान को समर्पित स्वामी कल्याणदेव के तप, त्याग और सादगी से वह बड़े प्रभावित रहे। 1 दिसंबर, 1967 को बतौर मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह भोपा के जनता इंटर कॉलेज में पधारे और एक घंटे तक शिक्षा के प्रोत्साहन पर बोले। कई नेताओं ने सभा में बीकेडी के समर्थन में कुछ अपील कराने का प्रयास किया, मगर उन्होंने शिक्षा के मंच पर राजनीति की बात करने से इनकार कर दिया था। यही नहीं चौधरी साहब ने आधी-अधूरी पत्रावली पर कालेज परिसर में डिग्री कालेज का शिलान्यास करने से मना कर दिया। बोले, मानक पूरे करो, तभी शिलान्यास करूंगा। शिक्षा ऋषि के आग्रह पर 23 मार्च, 1981 को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह पुन: जनता इंटर कॉलेज में आए, जहां उन्होंने प्रशासनिक भवन एवं विज्ञान संकाय का उद्घाटन किया था।
चौधरी साहब के पत्र उनके उसूलों के गवाह
26 जुलाई, 1976 को स्वामी कल्याणदेव ने विधानसभा में विरोधी दल के नेता चौधरी चरण सिंह को पत्र लिखा और इंदिरा गांधी के साथ मिलकर राजनीति में चलने की राय दी। चौधरी साहब ने 31 जुलाई, 1976 को संत विभूति को जवाबी चिट्ठी भेजी, जिसमें उनकी सैद्धांतिक दृढ़ता सामने आई । उन्होंने कहा- श्रद्धेय स्वामीजी, श्रीमति इंदिरा गांधी और मेरे विचारों में जमीन-आसमान का अंतर है। उनका किसान, मजदूरों और गरीबों से कोई वास्ता नहीं है, वे केवल पार्टी हित को ध्यान रखती है। कदाचार और भ्रष्टाचार को बुरा नहीं मानती। इस अवगुण के दोषियों को बढ़ावा देती है, जबकि मुझे यह सहन नहीं है।
संसद में पहुंचाई थी किसानों की आवाज : ओमानंद
भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद बताते हैं कि मुख्यमंत्री रहते वर्ष 1967 में वीतराग संत की पहल पर मुजफ्फरनगर रेलवे लाइन के बराबर में समाज कल्याण विभाग से बजट जारी कर दलित छात्रावास खुलवाया था। चौधरी साहब उस राजनीति के प्रतीक थे, जिन्होंने संसद तक खेती-किसानी की आवाज पहुँचाई थी।
सदाचरण से बने थे किसान मसीहा: गुरुदत्त
चौधरी साहब स्वच्छ राजनीति के हिमायती रहे। यहीं वजह है कि उन्होंने पश्चिमी यूपी में वीरेंद्र वर्मा को साथ लेकर ग्रामीण विकास को नई प्रगति दी थी। वर्ष 1969 में सूबे में मध्यावधि चुनाव हुआ। बीकेडी के 99 विधायक जीते , जिनमें जिले की सभी आठ सीटें भी बीकेडी के हिस्से आई। चौधरी साहब ने पार्टी की शानदार जीत पर वीरेंद्र वर्मा और साथियों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की थी। पूर्व राज्यपाल वर्मा के मित्र आचार्य गुरुदत्त आर्य बताते है कि वर्ष 1980 में चौधरी साहब अस्वस्थ वीरेंद्र वर्मा का कुशलक्षेम जानने दिल्ली के एक हास्पिटल में पहुँचे थे। 24 नवंबर, 1983 को मुजफ्फरनगर के टाउन हॉल में वर्मा ने एक बड़ी जनसभा रखी थी, जिसमें चौधरी चरण सिंह ने बड़ा मार्मिक भाषण दिया था। उन्होंने वर्मा को राज्यसभा भेजा था।
किसान मसीहा चौधरी चरण सिंह को दिया जाए भारत रत्न
पुरकाजी। गांव भूराहेड़ी निवासी 75 वर्षीय चौधरी बिरम सिंह राठी का कहना है कि चौधरी चरण सिंह ने हमेशा किसान व देश हित की बात की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए किसानों के हितों के लिए कई कानून बनाए। चौधरी साहब सादा जीवन जीने में विश्वास रखते थे। चौधरी साहब को भारत रत्न मिलना चाहिए।
किसान की सेवा कर गए चौधरी साहब
जानसठ। बसायच गांव निवासी कैलाश चंद कबीर कहते हैं कि किसानों के मसीहा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने किसानों, मजदूरों और दूसरे वर्गों के लिए आजीवन कार्य किए। चौधरी साहब जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने किसानों के हितों को देखते हुए कई कानून बनाए और जमीदारी उन्मूलन का काम भी किया। अर्थशास्त्र पर लिखी उनकी किताब आज भी हावर्ड यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम में शामिल है।