- न्याजुपुरा के छह परिवारों ने कंपोजिट विद्यालय में शरण ली
- लोग अपने मकान खाली कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच रहे
- डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट ने मौके पर पहुंचकर किया निरीक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। काली नदी का पानी शहर में घुसने से हालात मुश्किल होने शुरू हो गए हैं। नदी किनारे के सैकड़ों मकानों में पानी घुस गया। न्याजूपुरा, गौशाला रोड, प्रेमपुरी में नदी के किनारे के घर प्रभावित हुए। चरथावल मार्ग से न्याजुपुरा को जाने वाला रास्ता पानी में बह गया है। मोती झील और नदी की धार आपस में मिल गई है। डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी और सिटी मजिस्ट्रेट विकास कश्यप ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
मुजफ्फरनगर शहर का बड़ा हिस्सा काली नदी के के किनारे ही बसा है। तीन दिन से काली में लगातार पानी बढ़ रहा है। नदी किनारे रहने वाले लोगों ने पानी भरने से मकान खाली करने शुरू कर दिए हैं। सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे है। न्याजुपुरा के सैकड़ों घरों में पानी भर गया है। अनवर, इंतजार अली, कल्लू समेत छह लोगों के परिवारों ने कंपोजिट विद्यालय में शरण ली है। यहां बहुत से परिवारों का जरूरत का सामान पानी में डूब गया है।
यही हाल गोशाला रोड के नदी के किनारे रहने वाले लोगों का है। 50 से अधिक मकान नदी की चपेट में है। प्रेमपुरी में भी 50 से अधिक परिवार पानी की चपेट में है। डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट ने लोगों से बात की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। भाजपा नेता गौरव स्वरूप ने भी सभासदों के साथ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
दो ट्रांसफार्मर पानी के बीच में आए, आपूर्ति बंद
न्याजुपुरा में बाढ़ आने से विद्युत निगम के दो ट्रांसफार्मर भी पानी के बीच में आ गए हैं। इसके चलते निगम ने हादसे को देखते हुए आपूर्ति बंद कर दी है।
पानी में डूबी किसानों की दिन-रात की मेहनत
मुजफ्फरनगर। काली नदी के पानी में किसानों की दिन-रात की मेहनत से तैयार फसल पानी में डूब गई है। किसान 15 साल बाद काली को इस रौद्र रूप में देख रहे हैं। काली नदी में आई बाढ़ में चरथावल रोड से नदी की तरफ का समस्त जंगल चपेट में आ गया है। किसानों की तैयार सब्जी, गन्ना, धान आदि की फसल डूब गई है। लछेड़ा, खांजापुर, मीरापुर गांव के किसानों की हजारों बीघा फसल डूब गई है। किसान राजपाल, कदम सिंह, करण सिंह आदि का कहना है कि 15 साल बाद काली नदी में इतना पानी आया है।
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- रणवीर सैनी
मुजफ्फरनगर के न्याजूपुरा में काली नदी के बढे जलस्तर से घरो में घुसा पानी।