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गंगा को पृथ्वी पर लाने में महाराजा भगीरथ ने की कठोर तपस्या

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देवबंद (सहारनपुर)। सैनी एजुकेशनल एंड टेक्निकल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा बुधवार को महाराजा भगीरथ की जयंती सादगी के साथ मनाई गई।
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शिक्षक नगर में सोसाइटी के सचिव संजय सैनी के आवास पर कार्यक्रम में सर्वप्रथम महाराजा भगीरथ की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके बाद हवन पूजन किया गया। अध्यक्ष बलवीर सैनी ने कहा कि महाराजा भगीरथ अयोध्या के इक्ष्वाकु सूर्यवंशी राजा थे। वह अंशुमान के पौत्र और राजा दिलीप के पुत्र थे। अंशुमान अपने पुत्र दिलीप को राज्य भार सौंप कर गंगा को पृथ्वी पर लाने की चिंता में ग्रस्त थे। उन्होंने घोर तपस्या करते हुए शरीर त्याग किया। राजा दिलीप गंगा को पृथ्वी पर लाने का कोई मार्ग नहीं सोच पाए और बीमार होकर स्वर्ग सिधार गए। भगीरथ के सामने अपने पितामह का वचन और पिता का तप था। उन्होंने अपनी कठिन साधना और घोर तपस्या के बल पर भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया। वह गंगा को पृथ्वी पर लाने में सफल हुए। उन्होंने कहा कि हमें महाराज भगीरथ के वंशज होने पर गर्व है। उन्होंने समाज के लोगों को उनके आदर्शों पर चलने के लिए आह्वान किया। इस मौके पर संजीव सैनी, सुमित सैनी, चेतराम सैनी, अरुण सैनी, शुभम सैनी, आकाश सैनी आदि रहे।
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