चबूतरे पर बैठकर बापू ने जगाई थी आजादी की अलख
प्रेम सागर
भोपा (मुजफ्फरनगर)। क्षेत्र के तीन गांवों के बीच बना गांधी चबूतरा आजादी की अमर गाथा का गवाह है। यहां ग्रामीणों के साथ बैठकर गांधी जी ने आजादी की अलख जगाई थी। सिकंदरपुर, रहमतपुर और गड़वाड़ा के बीच चौराहे पर बना यह चबूतरा जिले के लोगों के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं है।
ग्रामीण बताते हैं कि गांधी जी ने तीनों गांव के जिम्मेदार लोगों के साथ एक स्थान पर बैठ कर आजादी की अलख जगाई थी। तीनों गांव के लोगों ने गांधीजी को आश्वासन दिया था कि वह किसी भी परिस्थिति में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेेंगे। तभी से इस स्थान का नाम गांधी चबूतरा पड़ गया था। इस चबूतरे का जीर्णोद्धार मोरना ब्लॉक के प्रमुख अनिल राठी ने 15 अगस्त 2019 को कराया था। गांधी चबूतरे पर लगे शिलापट पर मोरना विकास खंड क्षेत्र के 12 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों कबूल सिंह, महाराज सिंह धीराहेड़ी, टीकम सिंह, हरदम सिंह, हुकुम सिंह बेहड़ा थ्रू, दिलेराम, संदल सिंह, राजाराम निवासी सिकंदरपुर, मंगल सिंह, शरद सिंह बरूकी, रघुनंदन सिंह रहमतपुर, बीरबल सिंह मीरावाला के नाम अंकित है।
बेलड़ा के ग्रामीणों ने अंग्रेज अफसर से चलवाए थे बैल
क्षेत्र के गांव बेलड़ा निवासी 85 वर्षीय चौधरी धर्मवीर सिंह ने बताया कि अंग्रेज अफसर किसानों को परेशान करते थे। एक अंग्रेज अफसर ने किसानों के बीच आकर रौब ग़ालिब किया, जिस पर किसानों को गुस्सा आ गया। किसानों ने उसे बंधक बना लिया और दो घंटे तक उससे गेहूं की मड़ाई के लिए बैलों को हंकवाया था।
बापू से मिलती थी संदल सिंह की शक्ल
गांव सिकंदरपुर निवासी पूर्व प्रधान मेन पाल सिंह ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संदल सिंह उनके बाबा थे। बाबा संदल की शक्ल महात्मा गांधी जी से मिलती थी। जिसे आसपास के लोग गांधी जी कहकर पुकारते थे। आजादी को लेकर बनाई जा रही फिल्म में उन्हें फिल्म डायरेक्टर ने गांधी जी का रोल देने के लिए बुलाया था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया था। उनसे मिलने पंडित जवाहरलाल नेहरू गांव में आए थे।