- 11 अक्तूबर को अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-चार ने कवाल के बवाल में सुनाई थी सजा
- विक्रम सैनी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल की थी अपील
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। खतौली के निवर्तमान भाजपा विधायक विक्रम सैनी की कवाल के बवाल में निचली अदालत से हुई सजा के खिलाफ की गई अपील हाईकोर्ट में मंजूर कर ली गई है। मगर, सुनवाई के लिए तिथि तय नहीं की गई। सैनी का कहना है कि चुनाव से पहले ही उन्हें हाईकोर्ट से राहत की उम्मीद है।
अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एमपी/एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी गोपाल उपाध्याय ने 11 अक्तूबर के कवाल के बवाल में विधायक विक्रम सैनी सहित 12 आरोपियों को दो-दो साल और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। प्रकरण में सजा के बाद विधायक विक्रम सैनी की विधानसभा की सदस्यता समाप्त हो गई है। चुनाव आयोग उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू करा चुका है। पांच दिसंबर को मतदान होना है। निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ निवर्तमान विधायक विक्रम सैनी ने भी हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिससे मंजूर कर लिया गया है। हालांकि इस पर सुनवाई के लिए तिथि तय नहीं हुई है। विक्रम सैनी ने बताया कि सोमवार या मंगलवार को सुनवाई की संभावना है।
इन धाराओं में सुनाई गई थी सजा
निवर्तमान विधायक विक्रम सैनी, धर्मवीर, सलेकचंद, रविंद्र, रोहताश, सोनू, दीपक, प्रदीप, नूर मोहम्मद, मुकर्रम और दीपक पर धारा 147, 158, 336, 149, 504, 506 और 7 क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट के अंतर्गत सजा सुनाई गई थी। जबकि अभियुक्त फारूख को 25 आयुध अधिनियम का दोषी पाया गया था। धारा 307 में विक्रम सैनी को दोषमुक्त करार दिया गया था। पुलिस ने उनके हाथ में बलकटी दिखाई थी।
यह था मामला
कवाल कांड के बाद गांव में तनाव का माहौल था। 29 अगस्त 2013 को दोपहर 12 बजे दोनों समुदाय के लोग आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए एक-दूसरे के सामने आ गए। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव किया। लाठी डंडे और अवैध हथियारों से हमला किया। पुलिस ने दोनों पक्षों के 28 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। 15 आरोपी दोषमुक्त हो गए। मुकदमे के ट्रायल के दौरान एक अभियुक्त की मौत हो गई थी।