मुजफ्फरनगर। टिपर वाहनों की आपूर्ति, वॉल पेंटिंग और सीएमओ ऑफिस के पास कचरा एकत्र कराने के कक्ष निर्माण के मामले में वित्तीय अधिकार खो चुकीं चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल को अब शासन ने पद से हटा दिया है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने अध्यक्ष पद से हटाए जाने का पत्र जारी किया। उनके दोनों प्रत्यावेदन भी शासन ने निरस्त कर दिए गए है। पूरे मामले की एसआईटी से जांच कराए जाने की तैयारी है।
शासन के प्रमुख सचिव की ओर से दस अक्तूबर को जारी किए गए पत्र में चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल को उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा-48 की उपधारा-2 (क) एवं (ख) सहित अन्य के कर्तव्य पालन में चूक, कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर अवचार, नगरपालिका निधि को हानि पहुंचाने, पालिका निधि के दुरुपयोग एवं पालिका के हित के प्रतिकूल कार्य करने के लिए दोषी पाया है। इसके आधार पर ही राज्यपाल ने उन्हें पद से हटाने की स्वीकृति प्रदान कर दी। यही नहीं शासन ने दो मई और आठ जुलाई को दिए गए उनके प्रत्यावेदन को तथ्यहीन एवं बलहीन होने के कारण निरस्त कर दिया है। शिकायतकर्ता सभासद राजीव शर्मा का कहना है कि उन्होंने एसआईटी से जांच के लिए प्रार्थना पत्र दिया है। जल्द ही इस पर भी फैसला होगा। एसआईटी की जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
शासन ने इन आरोपों में माना दोषी
- 11 टिपर वाहनों की कीमत 72,62,423 के सापेक्ष गोल्डन ट्राइगंल एजेंसी को 1,58,12,211 का भुगतान किया गया। पालिका को 82,49,788 की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है।
- फर्म गोल्डन ट्राइगंल एजेंसी निविदा की शर्तों को पूरी नहीं करती। घोर वित्तीय अनियमितता की गई, जिसके लिए चेयरपर्सन दोषी हैं।
- स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत कार्यस्थलों पर पोस्टर, बैनर, फ्लेक्सी बोर्ड, दीवार लेखन के प्रचार-प्रचार में अनियमितता मिली।
- चेयरपर्सन ने अपने फोटो लगवाए और शासन को पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
- पोर्टेबल कंपेक्टर क्रय किए जाने के बाद क्रियाशील नहीं रखे गए। चेयरपर्सन ने रुचि नहीं ली। जनहित के कार्य में घोर लापरवाही बरती गई।
इस तरह रहा अग्रवाल का कार्यकाल
- 12 दिसंबर 2017 को शपथ ली
- 20 दिसंबर 2020 को भाजपा में शामिल
- 19 जुलाई 2022 को वित्तीय अधिकार छिने
- 20 जुलाई 2022 से सिटी मजिस्ट्रेट प्रशासक
- 22 सितंबर 2022 इस्तीफे का एलान
- 10 अक्तूबर 2022 पद से हटाने के आदेश जारी