- गोपूजन के साथ पशुओं के लाने का सिलसिला शुरू
- फरवरी में प्रत्येक गावं से पशु लाने की पहल की गई
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अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। तुगलकपुर कम्हेड़ा में बनाए गए गाय अभयारण्य में गोवंशीय पशुओं के लाने का सिलसिला शुरू हो गया। पहले दिन रतनपुरी से 85 पशु लाए गए। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने गाय पूजन किया। करीब पांच हजार पशुओं को लाने का लक्ष्य रखा गया है।
श्री गोवर्धन गोसेवा समिति और पशु चिकित्सा विभाग संयुक्त रूप से अभयारण्य का संचालन करेगा। करीब 64 करोड़ रुपये से बनाए गए अभयारण्य में सबसे पहले रतनपुरी गांव से मिनी ट्रक में चार गोवंशीय पशु लाए गए। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ संजीव बालियान ने गाय का पूजन कर गोवंशीय पशुओं को रखने की शुरुआत की। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितेंद्र गुप्ता ने बताया कि प्रत्येक गांव से क्रमवार गोवंशीय पशुओं को लाया जाएगा। ग्रामीण सीधे अपने पशु लेकर नहीं पहुंचे।
ग्राम प्रधान या उनके प्रतिनिधि ही पशु लेकर आएंगे। प्रत्येक गोवंशीय पशु की टैगिंग की जाएगी। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी, श्री गोवर्धन गोसेवा समिति के अध्यक्ष कुशपुरी, उपाध्यक्ष दिनेश मोहन एडवोकेट, सचिव विपुल भटनागर, कोषाध्यक्ष आशुतोष कुच्छल, संयुक्त सचिव शिशुकांत गर्ग, उद्योगपति राकेश बिंदल, अमित गर्ग और शुभम आर्य मौजूद रहे।
अभयारण्य का लगेगा सीएनजी पंप : बालियान
केंद्रीय पशुपालन राज्य मंत्री डाॅ. संजीव बालियान ने कहा कि पशुओं के लाए जाने से किसानों को राहत मिलेगी। करीब 500 लोगों को रोजगार मिलेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जिले में शुरूआत हुई है। दस एकड़ जमीन पर फार्मा ट्रेनिंग सेंटर का निर्माण भी केंद्रीय संस्था एनडीटीबी के माध्यम से कराया जाएगा। मैत्री योजना के अंतर्गत तीन महीने की ट्रेनिंग युवाओं को दिए जाने की व्यवस्था होगी। इसमें वैक्सीनेशन, प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग दी जाएगी। अभयारण्य का सीएनजी पंप लगाएंगे साथ ही खाद भी बनाई जाएगी।
रोजाना एक पशु पर खर्च होंगे सौ रुपये
केंद्रीय राज्य मंत्री ने बताया कि एक पशु को पालने के लिए प्रतिदिन 100 रुपये की आवश्यकता है, सरकार से 50 रुपये प्रति पशु के लिए आर्थिक सहायता मिलेगी। जबकि 50 रुपये आपसी सहयोग से जुटाएंगे।
बैल चलाएंगे बुग्गी और गायों का बांझपन होगा दूर
गाय अभयारण्य में लाए गए पशुओं को तीन अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। बैल, गाय और बछड़े-बछिया अलग-अलग किए जाएंगे। बैलों को बुग्गी में चलाया जाएगा। इसमें किसानों से भी मदद ली जाएगी। इसके अलावा गायों का बांझपन दूर करने का प्रयास होगा। बैल जरूरत पड़ने पर किसानों को दिए जाएंगे।