संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। डेंगू पॉजीटिव आंगनबाड़ी की उपचार के दौरान मौत हो गई। निजी अस्पताल में भर्ती महिला की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा करते हुए चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाया। उधर, जिले में डेंगू के और सात पॉजीटिव केस सामने आए। जिले में अब संख्या 233 हो गई है।
थाना पुरकाजी क्षेत्र के गांव भैसानी निवासी आंगनबाड़ी सुनीता (45) पत्नी चंद्र किरण को तीन दिन पहले बुखार आया था। सोमवार सुबह सुनीता को थाना सिविल लाइन क्षेत्र के महावीर चौक स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां शाम को इलाज के दौरान सुनीता की मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि सुनीता की प्लेटलेट्स बीस हजार से भी कम रह गई थीं। वहीं, रिपोर्ट में महिला डेंगू पॉजीटिव पाई गई थी। परिजनों का आरोप है कि चिकित्सक ने लापरवाही बरतते हुए इलाज किया है। पुलिस को तहरीर देकर कार्रवाई किए जाने की बात कही।
सीओ सिटी रामाशीष यादव का कहना है कि मामले में तहरीर आई है। शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। वहीं, सोमवार को सात मरीज डेंगू पॉजीटिव पाए गए। एक जानसठ, एक खतौली, एक चरथावल, दो मेघाखेड़ी और दो शहरी क्षेत्र से डेंगू के मरीज सामने आए। अब डेंगू मरीजों की संख्या 233 पर पहुंच गई है।
बुखार से बच्ची की मौत
जानसठ। कस्बे में बुखार से सात वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। कस्बे के अलावा क्षेत्र के आसपास के गांव में बुखार का प्रस्ताव लगातार बढ़ता जा रहा है। कस्बे के मोहल्ला हुसैनपुरा निवासी सुनील तेजियान की सात वर्षीया बेटी अवनी को पिछले दो दिनों से बुखार था। जिसे एक स्थानीय अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर चिकित्सक ने उसे मेरठ के लिए रेफर कर दिया। जिसकी मेरठ ले जाते रास्ते में ही मौत हो गई। नगर पंचायत अध्यक्ष डॉ. आबिद हुसैन ने मोहल्ले में कीटनाशक का छिड़काव कराया है।
यह हैं डेंगू के लक्षण
-अकस्मात तेज सिर दर्द व बुखार होना।
- मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द होना।
- आंखों के पीछे दर्द होना, जो कि आंखों को घुमाने से बढ़ता हैं।
- जी मिचलाना एवं उल्टी होना।
- गंभीर मामलों में नाक, मुंह, मसूड़ों से खून आना और त्वचा पर चकत्ते उभरना।
इन बातों का रखें खास ख्याल
- कूलर एवं पानी की टंकियों को खाली कर साफ करें।
- सोते समय मच्छरदानी का उपयोग जरूर करें।
- घरों या आसपास जहां कहीं भी रुका पानी हो, उसे सुखा दें।
- गमलों के नीचे रखे बर्तनों में से पानी को नियमित सुखाएं।
- पानी की टंकी के ढक्कन बंद रखें और सप्ताह में एक दिन इसको खाली करें।
- पुराने टायर, बर्तनों को हटा दें या फिर उनमें इकट्ठा पानी को सुखा दें।
- दरवाजों व खिड़कियों पर जाली लगवाएं।
- पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर रखें।