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अकिंचन धर्म का पूजन किया गया

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संवाद न्यूज एजेंसी
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खतौली। पर्यूषण पर्व के उपलक्ष्य में जैन मंदिरों में भक्ति भाव से मांगलिक क्रियाओं के साथ उत्तम अकिंचन धर्म का पूजन किया गया। श्रद्धापूर्वक जिनेंद्र भगवान की शांति धारा और धार्मिक विधान किया गया। साथ ही अष्ट द्रव्य अर्घ्य अशोक शास्त्री के मार्गदर्शन में अर्पित किए गए।
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शिवभूषण महाराज ने बताया अकिंचन का अर्थ है मेरे से अतिरिक्त कुछ भी मेरा नहीं है। आज सभी प्राणी अकिंचन के अभाव में दु:खी है। अकिंचन की भावना के बिना कोई भी पवित्र एवं महान नहीं बन सकता। महात्मा गांधी का सर्वत्र सम्मान उनके अकिंचन भाव के कारण है। इसी एक नियम के माध्यम से हम जीवन में शांति ला सकते है। परिग्रह जीवन में आकुलता देता है। आकुलता दु:ख की जननी है। सुख शांति तो निराकुलता में मिलती है। परिग्रह से बचकर अकिंचन धर्म को प्राप्त करने का उपाय करना चाहिए। इस अवसर पर संजय, मनोज, मुनेश, सुरेंद्र, सुभाष, वीरेश, अजय, सुनील, पतेंद्र, अजय प्रवक्ता, अरुण, डॉ. ज्योति, करुणा, निधि, हेमलता, डॉ. आशा, अनीता, नीरज जैन मौजूद रहे।
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