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मां के आंचल में पलेगा आरव, अदालत ने पलटा बाल कल्याण समिति का फैसला

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- सात साल के मासूम को लेकर मां और दादा में चल रही अदालती लड़ाई
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- अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय सिंह पुंडीर ने की सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। सात साल के मासूम आरव की परवरिश के लिए दादा राजकुमार से चली आ रही अदालती लड़ाई में मां प्रियांशी को आखिरकार राहत मिल गई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या-प्रथम जय सिंह पुंडीर ने आरव को दादा को सौंपने के बाल कल्याण समिति के फैसले को निरस्त कर दिया। मासूम आरव फिलहाल अपनी मां के पास ही रहेगा।
अधिवक्ता रामअवतार तायल ने बताया कि शाहपुर क्षेत्र के काकड़ा गांव निवासी प्रियांशी की शादी 15 फरवरी 2013 को बागपत के बिहारीपुर गांव निवासी आईटीबीपी के जवान सूरज पुत्र राजकुमार के साथ हुई थी। प्रियांशी ने बेटे आरव को जन्म दिया। बीमारी के चलते फरवरी 2021 में सूरज की मौत हो गई। पति की मौत के बाद प्रियांशी बेटे आरव को लेकर मायके लौट आई। मामले में नया मोड़ तब आया जब दादा राजकुमार ने 19 मार्च 2021 को खुद को आरव का संरक्षक बताते हुए बाल कल्याण समिति मुजफ्फरनगर में प्रार्थना पत्र दिया। समिति ने 13 जुलाई 2021 को आरव की उसके दादा को सौंपने का आदेश दिया। समिति के फैसले के विरोध में प्रियांशी ने जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया। प्रकरण की सुनवाई एडीजे-प्रथम ने की। अधिवक्ता रामअवतार तायल ने अदालत ने समिति के फैसले को निरस्त कर दिया है।
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बाल कल्याण समिति के क्षेत्र पर उठाया सवाल
अदालत में प्रियांशी पक्ष का कहना था कि बाल कल्याण समिति को आरव का संरक्षण देने का अधिकार ही नहीं है। अदालत ने क्षेत्राधिकारी के बिंदु को सही मानते हुए मुकदमा सुनने की अनुमति प्रदान की और समिति के फैसले को पलट दिया।
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