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भारतीय संस्कृति को प्रत्येक दर्शन अहिंसा को प्रमुख रखता है-जैन

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भारतीय संस्कृति में अहिंसा प्रमुख
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खतौली। केके जैन डिग्री कॉलेज में दस दिवसीय जैन दर्शन कार्यशाला के छठे दिन मुख्य वक्ता पंडित विकास कुमार जैन ललितपुर ने उत्तम संयम पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्राणी संयम और संयम दो प्रकार का संयम है। जिसमें जलकायिक, वायुकायिक, अग्निकायिक, पृथ्वीकायिक, वनस्पतिकायिक और त्रस्कायिक छह शरीर वाले जीवों की अहिंसा का संयम होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का प्रत्येक दर्शन में अहिंसा मुख्य है। हमारी पांच इंद्रियों में स्पर्श, रस, धाण, चक्षु, कर्ण और मन है। हमें इनके भोगों पर नियंत्रण रखना चाहिए इनमें मन सबसे चंचल होता है। छात्र व छात्राओं से संयम के विषय में जानकारी ली। धर्म सभा में महाविद्यालय प्रबंध समिति सचिव मुकेश कुमार जैन, विजय कुमार जैन, कल्पेंद्र कुमार जैन, नीरज जैन, हितेश जैन, राजकुमार जैन प्रवक्ता आदि एवं महाविद्यालय के डा. नीतू वशिष्ठ, डा. कमल किशोर, डा. रीना, डा. सपना जैन, डा. मनीष कुमार जैन, दीप्ति जैन, डा. विपिन कुमार बंसल, डा. पंकज कुमार, अशीष जैन, राहुल माहेश्वरी, डा. संजीव कुमार, डा. सचिन गोयल, रीचा अग्रवाल, डा. रीचा जैन, मेघा फातिमा, डा. अल्पना गर्ग, डा. शालिनी जैन, मुकुल कुमार, सोनिया, कंचन कुमारी, अतुल कुमार, संदीप कुमार आदि रहे।
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