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व्यक्तित्व विकास प्रक्रिया, चरित्र निर्माण परिणाम

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समाज में पनप रही एकाकी सोच घातक
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मुजफ्फरनगर। शिक्षाविद् अतुल कोठारी ने कहा कि व्यक्तित्व विकास एक प्रक्रिया है और चरित्र निर्माण उसका परिणाम। समाज में पनप रही एकाकी सोच घातक है।
जैन कन्या पाठशाला महाविद्यालय में चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व का समग्र विकास विषय पर आयोजित गोष्ठी में शिक्षाविद एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव प्रोफेसर अतुल कोठारी ने कहा कि देश को बदलना है तो शिक्षा को बदलो। व्यक्तित्व विकास एक प्रक्रिया है और चरित्र निर्माण उसका परिणाम है। वर्तमान मेें जीवन की सार्थकता को केवल भौतिक सुख सुविधाओं से जोड़ लेने से एकाकी संकीर्ण सोच समाज में पनपती जा रही है। धनार्जन और बाहरी सुख समृद्धि जीवन का उद्देश्य बनता जा रहा है। शिक्षा का उद्देश्य नैतिक पक्ष होना चाहिए, जिससे जीवन का निर्माण हो सके। डीएम राजीव शर्मा ने कहा कि चरित्र एवं व्यक्तित्व एक दूसरे के पूरक हैं। व्यक्ति का संपूर्ण स्वभाव अथवा चरित्र ही व्यक्तित्व कहलाता है। अच्छी आदतें ही मूल्य हैं। परिवार और विद्यालयों में मूल्यों की शिक्षा से ही नैतिकता के रास्ते पर चलने में सक्षम होता है। इस मौके पर समीर कौशिक, डीएवी कॉलेज की डॉ नीना अग्रवाल, सारिका जैन, सुनीता त्यागी, डॉ किरण तिवारी, रश्मि जैन, बबीता जैन, सुशीला जोशी आदि ने विचार रखे। इससे पूर्व, डॉ सीमा जैन और प्रबंध समिति के राजकुमार जथैन, राजेश जैन, संजय जैन, मनोज जैन, सुधीर जैन, डीके जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में डॉ निशा गुप्ता, डॉ वंदना वर्मा, नीता भटनागर, सोनाली सिंह, प्रतिमा शर्मा, दुष्यंत गर्ग, अमरदीप, डॉ पल्लवी, डॉ वर्चसा, डॉ पूनम भारद्वाज, डॉ अंजलि का सहयोग रहा।
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