बुढ़ाना। आर्य शिशु निकेतन के समारोह में समाज की उत्कृष्ट वैदिक सेवा को आचार्य गुरुदत्त आर्य एवं हरपाल शास्त्री को सम्मानित किया गया। मेधावी बच्चों को वैदिक साहित्य भेंट कर संस्कारों का महत्व बताया गया। वैदिक संस्कार समारोह में अतिथि आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वेदानुकूल आचरण से समाज और राष्ट्र का कल्याण होगा। वेद ईश्वरीय वाणी है। वेदों के ज्ञान-विज्ञान से विश्व को दिशा मिली। बच्चों को ज्ञानवान, चरित्रवान, देशभक्त, सदाचारी बनाए। गुणवान बच्चे राष्ट्र का अमूल्य धन है। शिक्षाविद् एवं कवि देव शर्मा ने कहा कि परिवार, समाज और देश के उत्थान को अभिभावक अपना आचरण आदर्श बनाए। वेद प्रचारक हरपाल शास्त्री ने कहा कि देश में आर्य समाज का प्रचार बढ़ेगा, तभी पाखंड, अंधविश्वास, बुराइयां दूर होगी। स्वतंत्रता संग्राम में महर्षि दयानंद सरस्वती की प्रेरणा से देश का युवा जागा था। यज्ञमान प्रधानाचार्य विकास कुमार सपत्नीक रहे। जय कुमार, रहतू लाल, ओमप्रकाश, देवी सिंह, राज सिंह आर्य, ब्रह्मदत्त, मांगे राम, राजपाल आदि मौजूद रहे। संचालन धर्मपाल सिंह ने किया।