गुरुओं का सम्मान करना सभी का धर्म
मोरना। महाशक्ति सिद्धपीठ शुक्रताल में गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर बोलते हुए योगिनी माता राजनंदेश्वरी ने कहा कि गुरु ही ब्रह्मा, गुरु ही विष्णु, गुरु ही महेश्वर है। गुरु सद् विवेक के सद्ज्ञान की रचना करते हैं। जीवन से कुविचारों को खत्म कर सद्मार्ग के पथ पर अग्रसर करते हैं। गुरु उस तत्व का नाम है, जो जीवन में होता है, उसका स्पष्टीकरण कराता है। अज्ञानता से ज्ञान की ओर ले चलें, मृत्यु से अमृत व अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाए वह गुरु है। गुरु बड़े ही भाग्यशाली लोगों को मिलता है। वह बड़े प्रयत्न के बाद मिलते हैं। इस मौके पर गुरु पूजा का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने योगिनी माता की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इससे पूर्व, हवन यज्ञ में दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने पूर्ण आहुति देकर विश्व में शांति की स्थापना की मनोकामना की। इस मौके पर सुनीता त्यागी, शशी, श्रद्धा, विमला, चंदा, यशपाल, बिजेंद्र, रविंद्र आदि ने भजन कीर्तन कर सत्संग में भाग लिया। भंडारे के प्रसाद का वितरण भी किया गया।