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संसार में दुखों का कारण अशिक्षा: स्वामी

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खतौली। मोहल्ला शिवपुरी के आर्य समाज में होलिकोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें स्वामी ने कहा कि संसार में दुखों का कारण अशिक्षा है। जीवन का लक्ष्य चार पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष है। ये ईश्वर स्तुति, प्रार्थना व उपासना से प्राप्त किए जा सकते हैं। विचारों से ही मानव का उत्थान व पतन होता है। मनुष्य के कार्य ही पाप व पुण्य में बदलते हैं। देश, काल और परिस्थिति से पाप व पुण्य की पहचान होती है। आर्य भजनोपदेशक पंडित नरेश निर्मल ने कहा कि विद्वान दूसरे में गुण देखते हैं। सुकीर्ति आर्या ने कहा कि निंदा रस विष से भी भयंकर होता है। इस दौरान पंडित नरेश निर्मल व सुकीर्ति आर्या ने ईश्वर भक्ति, देशभक्ति व सामाजिक सुधार के भजन सुनाए। इससे पूर्व चरण सिंह आर्य के आवास पर पंडित रामदेव शास्त्री के निर्देशन में यज्ञ हुआ। इसमें राजू उपाध्याय सपत्नीक यज्ञमान रहे। अध्यक्षता चौधरी मंशाराम और संचालन सत्येंद्र आर्य ने किया। अजेश आर्य, सुनील आर्य, ऋषिपाल आर्य, जगदीश आर्य, अजय, रामशरण, सुरेश आर्य, निधि, देशपाल आर्य, हरिश्चंद्र आर्य, अभयराम, बाबा रतन सिंह आर्य, कंवरपाल शास्त्री, रामानंद आर्य, महेशचंद आर्य, हरिश्चंद्र भंगेला आदि उपस्थित रहे।
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