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इधर के लोग नजारे उधर के देखते हैं-डा. असलम

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अमर उजाला ब्यूरो
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खतौली। एंग्लो पब्लिक स्कूल में आयोजित नशिस्त में शायरों ने अपने कलाम से मौजूदा हालात पर तंज कसे।
शुभारंभ आस मोहम्मद व अल्लामेहर शाहिद की नात-ए-पाक से हुआ। डा. असलम का कलाम ‘दिलो के बीच कशिश का अजीब रिश्ता है, इधर के लोग नजारे उधर के देखते हैं’। रजा खतौलवी का कलाम ‘जिंदगी की मैं सारी तल्खियां चुरा लाया, आज उसके होठों से सिसकियां चुरा लाया’। कामरान का कलाम ‘जख्म पाते हैं नमू कैसे दिखाएंगे कभी, हम तुझे अपनी उदासी से मिलाएंगे कभी’। अरुज अख्तर का कलाम ‘उसे है जौम ऊंचाईयों पे अपनी, मेरी गहराईयां भी कम नहीं है’। अमजद सैफी का कलाम ‘पड़ेगा तन्हा ही चलना शिकस्ता हाली में, के इस सफर में कोई हमसफर नहीं होता’। अल्ला मेहर शाहिद का कलाम ‘कैसे रात कटती है कैसे दिन गुजरता है, उनसे पूछिए जिनका अपना घर नहीं होता’। फखरुल इस्लाम का कलाम ‘नहीं होता तसव्वुर में कोई जब, जब वो होते है, ये आलम जब भी होता है कोई आलम नहीं होता’। जमाल हाशमी का कलाम ‘किसी ने सामने कल मेरे खुदकशी की थी, मै आज रेल की पटरी उखाड़ लाया हूं’। अध्यक्षता डा. अमीर आजम कुरैशी तथा संचालन मौलाना मोहम्मद अली जोहर ने किया।
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