मुजफ्फरनगर। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ योगा एंड नैट्रोपैथी के डॉ एमके तनेजा ने कहा कि असंतुलित आहार एवं अनियमित जीवन शैली के कारण रोग बढ़ रहे हैं। इससे मनुष्य के शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ रहे हैं। स्वामी विवेकानंद ऑडिटोरियम में आयोजित गोष्ठी में डॉ एमके तनेजा ने कहा कि योग के मुख्य आयाम यम, नियम, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान समाधि है। शरीर की प्रकृति के आधार पर शरीर के लिए आसन प्राणायाम और आहार का नियत निर्णय करके जीवन पर्यंत सुखी, समृद्ध एवं स्वस्थ रहा जा सकता है। मंजिलें राहत की अध्यक्षा डॉ तारिणी तनेजा ने कहा कि योग का मतलब पीटी या व्यायाम नहीं है। यह उन्नत मनोस्थिति में रहते हुए अपने निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति करना है। कार्यक्रम संयोजक पंडित संजीव कुमार शर्मा ने बताया कि 18 फरवरी को योग को लेकर लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर में अंतरराष्ट्रीय सेमीनार का आयोजित होगा। इस दौरान डॉ ईश्वर भारद्वाज, अनंत बिरादर, डॉ डीएन शर्मा, डॉ भानू जोशी, डॉ सुरेश बरनवाल, डॉ अमित नागपाल, डॉ नवदीप जोशी, डॉ तारिणी तनेजा आदि मौजूद रहे।