एक या दो नहीं बल्कि 38 लाशें गिर गईं। वह भी बेहद खौफनाक तरीके से।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट बताती है कि हत्यारे वहशी हो गए थे। चाकुओं के वार से इंसान छलनी कर दिए गए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर कत्ल धारदार हथियारों से बेरहमी से किए गए हैं। मृतकों के शरीर पर चाकू-छुरी के निशान हैं। वहशी अंदाज में एक या दो नहीं बल्कि कई-कई वार किए गए।
अधिकतर पोस्टमार्टम करने वाले डॉ. एमआर सिंह बताते हैं कि 20 लोगों की हत्या चाकू और धारदार हथियारों से की गई।
गोली के मामले कम ही सामने आए हैं। किसी दूसरे बड़े हथियार का इस्तेमाल भी कम ही किया गया।
वीभत्स तरीके से मौत के घाट उतारने का सिलसिला एक या दो नहीं बल्कि कई जगह चला। पहले कवाल में यही खेल हुआ। इसके बाद जौली गंगनहर पर धारदार हथियार चले।
कुटबा, लांक, बहावड़ी, लिसाढ़, मोहम्मदपुर राय सिंह आदि गांवों में धारदार हथियारों का ही इस्तेमाल किया गया।