मुरादाबाद। घंटों सोशल मीडिया पर समय बिताकर रील्स बनाने, स्टोरी और स्वयं के फोटो पोस्ट करने वाले युवा बार-बार यह देखते रहते हैं कि कितने लाइक्स या कमेंट्स आए। लाइक्स और कमेंट्स नहीं मिलने पर निराशा में घिर रहे हैं। चिकित्सीय भाषा में इसे जीरो बॉक्स सिंड्रोम कहते हैं। मनोचिकित्सकों ने बताया कि सोशल मीडिया युवाओं को जीरो बॉक्स सिंड्रोम का शिकार बना रहा है।
ऐसा होने पर वो तनाव की स्थिति में आ जाते हैं। जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक एस धनंजय ने कहा कि कोरोना के बाद से ऐसे केसों की संख्या बढ़ रही है। माता-पिता की शिकायत रहती है, कि बच्चे पूरा दिन सोशल मीडिया पर एक्टिव रहते हैं। ठीक से खाना भी नहीं खाते है। मनोचिकित्सक अनंत राणा ने बताया कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए युवा सुंदर दिखने के लिए फोटो को एडिट करते है। इसके बाद पोस्ट करते है। इससे उनके अंदर बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्या भी हो रही है। असल जिंदगी में जब वो अपनी तुलना पीछे छूटी उम्र से करने लगते हैं। तब तनाव की स्थिति में आ जाते है।