शनिवार से शुरू हो रहे इज्तिमा में शामिल होने के लिए शुक्रवार से ही अकीदतमंदों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। पहले दिन करीब 1500 लोग आयोजन स्थल पहुंच गए। जुमे की नमाज के बाद वहां पहुंचे लोगों को उलेमा ने इज्तिमा के बारे में बताया। अपने बयान में मुफ्ती अफ्फान ने कहा कि इज्तिमा का मकसद अच्छाइयों को अपने किरदार के जरिये आम करना है। किसी के साथ नेकी करो तो दिल से करो। कुरान और सुन्नत के मुताबिक जिंदगी जीना सीखो। जो जुबान से कहा जाए वो अमल से साबित हो। दीन-ए-इस्लाम यही कहता है।
अस्र की नमाज के बाद मुफ्ती इब्राहिम ने कहा कि बुराइयों से बचे। इज्तिमा का मतलब खैर बरकत की दुआ करना है। गुनाहों की माफी मांगना और दीनी बातें करना है। उन्होंने जमात में आए लोगों से तालीम पर ध्यान देने की अपील की। हर बुराई के रास्ते से बचने, गरीबों की मदद करने और दुआओं में अधिक से अधिक लोगों से पहुंचने की भी अपील की।
इस मौके पर हामिद मोहम्मद आलम, हबीबुर्रहमान, कारी नदीम, मुफ्ती अबू बकर, मोहम्मद आदिल, मोहम्मद राशिद, हबीब फुरकान अहमद आदि मौजूद रहे। इज्तिमा के मीडिया प्रभारी मो. राशिद ने बताया कि इज्तिमा का समापन रविवार को 11:00 दुआ के साथ होगा।
10 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद, व्यवस्था मुकम्मल
आयोजन के मीडिया प्रभारी मोहम्मद राशिद ने बताया कि शनिवार सुबह इज्तिमा का विधिवत आगाज होगा। उन्होंने बताया कि करीब 15 एकड़ क्षेत्र में इज्तिमा में आने वाले लोगों के लिए जगह-जगह अकीदतमंदों ने पंडाल लगाए हैं। करीब दस हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। उनके खााने, पीने, रहने, सोने, नमाज, वजू आदि की भी व्यवस्था की गई है। आयोजकों की ओर से दस नल लगाए गए हैं। पहले दिन करीब 15 सौ लोग इज्तिमा में पहुंचे। तमाम लोगों ने वहां उनकी खिदमत के लिए स्टॉल भी लगाए हैं।