फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्वेताभ की पत्नी का सनसनीखेज खुलासा: हत्या से पहले मिल रही थीं धमकियां, कोई कर रहा था परेशान, तीन बार बदला घर

Fri, 17 Feb 2023 05:25 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद

सार

शालिनी तिवारी ने मझोला थाने को दी तहरीर में कहा है कि जिसमें उन्होंने बताया कि उनके पति पिछले कुछ समय से परेशान थे। कई बार उनसे परेशानी की वजह जानने की कोशिश की लेकिन उन्होंने हर बार टाल दिया। कोई क्लाइंट उन्हें परेशान कर  रहा था। उन्हें धमकियां भी मिल रही थीं।
विज्ञापन
सीए श्वेताभ तिवारी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सीए श्वेताभ तिवारी को धमकियां मिल रही थीं। जिसे लेकर वो बहुत परेशान थे। उनकी पत्नी ने पूछताछ की तो उन्होंने किसी क्लाइंट की वजह से परेशानी होने की बात कहकर टाल दिया था। पुलिस ने पत्नी की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया है। सीए श्वेताभ तिवारी अपनी पत्नी शालिनी, बेटे सार्थक के साथ साईं गार्डन में रहते थे जबकि बड़ा बेटा अजमेर में रहकर पढ़ाई कर रहा है।

विज्ञापन

शालिनी तिवारी ने मझोला थाने को दी तहरीर में कहा है कि जिसमें उन्होंने बताया कि उनके पति पिछले कुछ समय से परेशान थे। कई बार उनसे परेशानी की वजह जानने की कोशिश की लेकिन उन्होंने हर बार टाल दिया। कोई क्लाइंट उन्हें परेशान कर रहा था। उन्हें धमकियां भी मिल रही थीं। एसएसपी हेमराज मीना ने बताया कि तहरीर के आधार पर हत्या का केस दर्ज किया गया है। पत्नी ने बताया कि उनके पति किसी क्लाइंट की वजह से परेशान थे।

सीए ने शहर में तीन बार बदला आवास
सीए श्वेताभ तिवारी का परिवार कोतवाली क्षेत्र में दीनदारपुरा मोहल्ला निवासी है। पंद्रह साल पहले तक श्वेताभ तिवारी भी यहीं रहते थे। इसके बाद उन्होंने रामगंगा विहार में अपना आवास बना लिया था। तीन साल पहले श्वेताभ तिवारी साईं गार्डन में बस गए थे। इसके अलावा भी शहर में उनके और भी मकान होने की जानकारी मिली है।

अपराधियों को पकड़ने के लिए बनी एसओपी हुई फेल
अपराधियों को शहर में घेरकर पकड़ने के लिए जिला पुलिस ने एसओपी बनाई है, लेकिन बुधवार की रात शहर के सीए की सरेआम हत्या के बाद शूटर पुलिस को चुनौती देते हुए आराम से भाग गए। शहर के किसी स्थान पर एसओपी का असर दिखाई नहीं दिया। अपराधियों ने दिल्ली रोड पर बने कॉप्लेक्स परिसर में चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं। उनकी घटनास्थल पर मौत हो गई। अपराधियों ने सीए की मौत के बाद कई गोलियां चलाई। उनको पुलिस का डर नहीं था। वे आराम से बाइक पर बैठकर भाग निकले। 

घटना के काफी देर बाद पहुंची पुलिस
पुलिस घटना के काफी देर बाद मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने भी मौके का मुआयना किया। इसके बाद पुलिस की टीमें  सीसीटीवी फुटेज को खंगालने में जुट गईं। यही कारण है कि आरोपी गिरफ्त में नहीं आए। पुलिस ने शहर में घटना होने के बाद अपराधियों को पकड़ने के लिए एसओपी (स्टैडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर) बनाई है। पुलिसकर्मी इसका पालन एसएसपी या एसपी सिटी के निर्देश पर करते हैं। शहर में सनसनीखेज घटना के बाद पुलिस ने चौराहों पर चेकिंग नहीं की। इसी कारण संदिग्ध भी आराम से निकल गए। घटना के बाद पुलिस सिर्फ फुटेज को खंगालती रही। इसके पहले दिल्ली रोड पर ही विहिप के नेता को भी गोली मारकर हमलावर फरार हो गए थे। पुलिस ने इस घटना के बाद भी चेकिंग अभियान नहीं चलाया।

गलियों से बाइक निकाल कर ले गए हमलावर
गोली मारने के बाद हमलावर बुद्धि विहार की ओर भागे थे। लिहाजा पुलिस ने घटनास्थल के करीब 200 मीटर तक के सीसीटीवी कैमरों को बृहस्पतिवार को चेक किया। कुछ दूर तक हमलावर सीसीटीवी में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इसके बाद गलियों से बाइक निकाल ले गए। अंदाजा लगाया जा रहा है कि हमलावर यदि बाहर के थे तो पहले उन्होंने रेकी की होगी। इसके बाद घटना को अंजाम दिया होगा, चूंकि बुद्धि विहार की गलियों में भागने से आशय है कि उन्हें रास्तों की जानकारी थी। इसके अलावा पुलिस को यह भी शक है कि आरोपी मुरादाबाद के रहने वाले हो सकते हैं।

आठ हजार नंबरों के बीच छिपे हैं साजिशकर्ता और शूटर
मुरादाबाद। चार्टर्ड अकाउंटेंट की हत्या के बाद पुलिस उन आठ हजार मोबाइल नंबरों में साजिशकर्ता और शूटरों को खंगालने में जुट गई है, जो नजदीकी टावर की रेंज में थे। पुलिस को अभी तक संदिग्ध नंबर नहीं मिल सके हैं। एसएसपी के निर्देश पर संदिग्ध नंबरों की तलाश करने के लिए पुलिस ने एसओजी की टीम को लगाया है। टीम ने घटनास्थल के पास मोबाइल टावर से सक्रिय आठ हजार नंबरों को लिया है। पुलिस इन नंबरों में संदिग्ध नंबरों की तलाश कर रही है। पुलिस का मानना है कि घटना से पहले साजिशकर्ताओं ने शूटरों से संपर्क किया होगा। साजिशकर्ताओं में महिला या पुरुष हो सकते हैं। मोबाइल नंबरों के आधार पर पुलिस शूटरों और साजिशकर्ताओं को पकड़ने का प्रयास कर रही है। पहले दिन संदिग्ध नंबर प्रकाश में नहीं आए हैं।

काफी गोपनीयता बरतते थे श्वेताभ
चार्टर्ड अकाउंटेंट श्वेताभ तिवारी किसी की कॉल आने पर वे सार्वजनिक तौर पर बात नहीं करते थे। वे काफी गोपनीयता बरतते थे। यदि कोई सामने बैठा रहता था तो कॉल करने वालों को कुछ देर बाद बात करने का समय देते थे। इसी कारण कार्यालय के लोगों को भी श्वेताभ के बारे में अधिक जानकारी नहीं मिल पाती थी। कार्यालय में भी अधीनस्थों को दिशा निर्देश देने के बाद हटा देते थे। सिर्फ अपने व्यवसाय के करीबी अखिल अग्रवाल और आर्किटेक्ट आरके मलिक से ही गोपनीय बात करते थे।
विज्ञापन

काम नहीं आए स्मार्ट सिटी के कैमरे
स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर के सभी प्रमुख मार्गों पर 263 हाईरेंज कैमरे लगाए गए हैं। दावा किया गया था कि यह कैमरे शहर की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। किसी वारदात के बाद कोई बदमाश आसानी से भाग नहीं सकेगा। उसकी तस्वीर कैमरे में कैद हो जाएगी।  35 स्थानों पर पैनिक बटन भी लगाए गए हैं। दावा किया गया था कि छेड़छाड़, लूटपाट अथवा अन्य किसी तरह की घटना होने पर पीड़ित अथवा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा उसे दबाने पर इसकी सूचना पहले कंट्रोलरूम फिर नजदीकी थाने की पुलिस तक पहुंच जाएगी। बुधवार सीए श्वेताभ तिवारी की हत्या के मामले में यह सभी दावे थोथे साबित हुए। करीब सवा दो सौ करोड़ रुपये की लागत से शहर के पीलीकोठी स्थित नगर निगम के कार्यालय परिसर में इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर की स्थापना की गई है। दो दिसंबर 2022 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका लोकार्पण कर चुके हैं। इसमें सिटी ऑपरेशन कक्ष बना कर उसमें बड़ी स्क्रीन लगाई गई है। शहर के सभी प्रमुख मार्गों पर 263 हाईरेंज कैमरे लगाए गए हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें