सरकारी व्यवस्था में कब जीवित को मृत और मृत व्यक्ति को जिंदा दर्शा दिया जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। धनौरा क्षेत्र में एक वृद्धा महिला ने समाधान दिवस में उसको मृत दिखाकर पेंशन रोके जाने की शिकायत की थी, तो अब जोया ब्लॉक के एक गांव में मृत लोगों को मनरेगा के तहत जॉब कार्ड से मजदूरी करा दी गई है। ग्रामीण की शिकायत पर सीडीओ ने मामले की जांच शुरू करा दी गई है।
मामला जोया ब्लॉक के जलालपुर घना से जुड़ा है। ग्रामीण चंद्रप्रकाश सिंह ने डीएम को संबोधित एक शिकायती पत्र सीडीओ अश्वनी कुमार मिश्रा को दिया था। जिसमें उन्होंने कहा कि गांव के जगदीश सिंह की मौत साल 2018 और राजू की मौत 2020 में हो चुकी है। दोनों मृतक मनरेगा में जॉबकार्ड धारक रहे थे। चंद्रप्रकाश के अनुसार मनरेगा में 28 मई 2022 से 11 जून 2022 तक जगदीश को कार्य करना दर्शाया गया था। इस दौरान उनके द्वारा किए मानव दिवसों की मजदूरी भी निकाल ली गई। साथ ही राजू व उसकी पत्नी को भी 25 जुलाई से मजदूरी कराना दर्शा दिया। इतना ही नहीं, रोजगार सेवक द्वारा भी उसकी पत्नी का जॉबकार्ड बनाकर हाजिरी लगाने की शिकायत की गई थी।
शिकायत पर सीडीओ अश्वनी कुमार मिश्रा ने मामले की जांच की तथा संबंधित मनरेगा एपीओ, ग्राम सचिव, ग्राम प्रधान व रोजगार सेवक को अपने कार्यालय में तलब करते हुए मामले की जानकारी ली। जिस पर उन्होंने मृत्यु होने के बाद भी दोनों जॉब कार्ड धारकों की मजदूरी निकाले जाने पर तत्कालीन सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश डीपीआरओ को दिए। साथ ही वर्तमान सचिव द्वारा जांच के लिए कार्यालय में उपस्थित न होने पर स्पष्टीकरण तलब किया है।
सीडीओ ने बीडीओ से तलब की आख्या
मामले को गंभीरता से लेते हुए सीडीओ ने बीडीओ जोया व कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा से रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने मनरेगा नियमों के तहत संबंधित दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए एक सप्ताह में जांच रिपोर्ट देने को कहा है। साथ ही जलालपुर घना पंचायत में मृतक जॉबकार्ड धारकों का सत्यापन तीन दिनों के भीतर कर उनके नाम हटाकर प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सीडीओ ने सभी खंड विकास अधिकारियों को मृत जॉब कार्ड धारकों का सत्यापन कर मनरेगा वेबसाइट पर अपडेट कराने का प्रमाण पत्र दिए जाने के निर्देश भी दिए हैं।