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Moradabad News: जिंदगी देने आए वेंटिलेटर अस्पताल में तोड़ रहे दम

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मुरादाबाद। कोरोना काल में पीएम केयर फंड से मिले 10 वेटिंलेटर जिला अस्पताल में बंद पड़े हैं। इन्हें संचालित करने के लिए स्टाफ व डॉक्टर ही नहीं हैं। ऐसे में वेंटिलेटर बेकार पड़े हैं और मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। 10 वेंटिलेटरों में से पांच जिला अस्पताल और पांच एमसीएच विंग में बंद हैं।
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विभागीय जानकार ने दावा किया कि पीएम केयर फंड से आए वेंटिलेटरों की गुणवत्ता ठीक न होने के कारण उन्हें मरीजों के इलाज में इस्तेमाल ही नहीं किया गया। सांसद निधि से, दूसरे जिलों के अस्पतालों व समाज सेवी संस्थाओं से मिले वेंटिलेटरों का ही प्रयोग कोरोना काल में किया गया। अब दूसरे जिलों के अस्पतालों से मिले वेंटिलेटर वापस कर दिए गए हैं।
सांसद निधि व पीएम केयर फंड से मिले वेंटिलेटर अस्पताल में बंद पड़े हैं। शासन स्तर पर जवाबदेही होने के कारण समय-समय पर इन वेंटिलेटरों को चलाकर चेक किया जाता है। इसके अलावा मरीजों के इलाज में इनकी कोई भूमिका नहीं है।
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डेढ़ करोड़ से बना आईसीयू भी ठप
कोरोना की दूसरी लहर में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर बनाया गया 30 बेड का आईसीयू भी ठप पड़ा है। वेंटिलेटर की जरूरत वाले करीब 30 मरीज हर महीने हायर सेंटर रेफर किए जाते हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वेंटिलेटरों को चलाने के लिए स्टाफ ही नहीं है। नियमानुसार वेटिलेंटर व आईसीयू के संचालन के लिए एनेस्थेटिक डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, टेक्नीशियन व सहायक डॉक्टर की जरूरत होती है। इनके न होने के कारण वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं।


कैसे चलाएंगे 100 बेड का सीसीयू
जिला अस्पताल परिसर में 100 बेड का सीसीयू बनाने का प्रस्ताव पास हो चुका है। सीएमओ स्तर से इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सवाल यह है कि जब 30 बेड का आईसीयू नहीं चल पाया तो 100 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट कैसे चलेगी। 10 वेंटिलेटर चलाने के लिए स्टाफ नहीं है, तो ज्यादा उपकरणों के लिए स्टाफ व डॉक्टर कहां से आएंगे। इन सवालों का जवाब फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पास नहीं है।
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पीएम केयर फंड से जिला अस्पताल को जो वेंटिलेटर मिले थे, उनमें सभी सुरक्षित हैं व संचालन की स्थिति में हैं। हाल ही में रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण वेंटिलेटरों का संचालन नहीं हो पा रहा है।
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- डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल।
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