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UP: संभल में जिला जज ने लिया बांके बिहारी मंदिर पर बावड़ी का जायजा, डीएम और एसपी भी रहे साथ

Sun, 05 Jan 2025 11:00 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, संभल

सार

जिला जज ने डीएम और एसपी के साथ संभल जिले के चंदौसी के लक्ष्मणगंज में 152 साल पुराने बांके बिहारी मंदिर का निरीक्षण किया। देखभाल के अभाव में यह मंदिर खंडहर में तब्दील हो गया। अब जिला प्रशासन ने मंदिर के जीर्णोद्धार और संरक्षण की पहल शुरू की है।
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जिला जज ने लिया बावड़ी का जायजा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संभल जिले के चंदौसी के गांव गनेशपुर स्थित प्राचीन श्रीबांके बिहारी मंदिर के पुनरुद्धार की पहल शुरू हो गई है। जिला जज ने डीएम और एसपी के साथ मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। डीएम ने मंदिर के रखरखाव और जीर्णोद्धार करवाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित किया जाएगा।

152 साल पुराने मंदिर का इतिहास

चंदौसी के मुस्लिम बहुल लक्ष्मणगंज इलाके में स्थित यह मंदिर 152 साल पुराना है। यह क्षेत्र कभी हिंदू संस्कृति की पहचान हुआ करता था, लेकिन पिछले 25 वर्षों में यहां हिंदुओं का पलायन बढ़ता गया। अब यह इलाका पूरी तरह से मुस्लिम बहुल हो चुका है। देखभाल के अभाव में मंदिर धीरे-धीरे खंडहर में बदल गया।

2010 में मूर्तियां खंडित हुईं

मंदिर के संरक्षक रहे कृष्ण कुमार के अनुसार, 2010 तक मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना होती थी। वर्ष 2024 में शरारती तत्वों ने भगवान बांके बिहारी की मूर्ति, शिवलिंग और अन्य मूर्तियों को खंडित कर दिया। इस घटना के बाद पुलिस कार्रवाई हुई, लेकिन मंदिर की स्थिति सुधारने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद मंदिर के गेट, शिखर और अन्य संरचनाएं भी तोड़ दी गईं।

खंडहर में तब्दील हुआ मंदिर

वर्तमान में यह मंदिर पूरी तरह खंडहर में बदल चुका है। जहां पहले मूर्तियां थीं, अब वहां केवल उनके निशान बचे हैं। आसपास के क्षेत्र में बढ़ती मुस्लिम आबादी और मंदिर की अनदेखी ने इसकी दुर्दशा को और बढ़ा दिया।

प्रशासन की पहल

अब प्रशासन ने इस ऐतिहासिक धरोहर को पुनर्जीवित करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। डीएम ने कहा कि मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए उचित योजना तैयार की जाएगी। उन्होंने इसे सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित करने और पुनः पूजा-अर्चना की व्यवस्था करने की बात कही।

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लक्ष्मणगंज का यह मंदिर क्षेत्र के लिए सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी है। स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई है कि मंदिर को फिर से उसकी पुरानी पहचान मिलेगी।

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