UP News :दस साल के अंतर में लड़े गए ये दोनों चुनाव वह हार गए थे लेकिन संगठन में न तो उनका कद कम हुआ और न ही दबदबा। वह संगठन में आगे बढ़ते रहे। वर्ष 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने संभल से भूपेंद्र सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था। उस वक्त उनके सामने चुनाव मैदान में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव थे।
संगठन से जुड़े कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह राजनीतिक सफर में दो बार चुनाव लड़े थे। दस साल के अंतर में लड़े गए ये दोनों चुनाव वह हार गए थे लेकिन संगठन में न तो उनका कद कम हुआ और न ही दबदबा। वह संगठन में आगे बढ़ते रहे।
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वर्ष 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने संभल से भूपेंद्र सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था। उस वक्त उनके सामने चुनाव मैदान में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव थे। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। भूपेंद्र सिंह को 143596 मत मिले थे। जबकि मुलायम सिंह यादव 259430 वोट पाकर विजयी हुए थे।
भूपेंद्र सिंह ने दूसरा चुनाव दस साल बाद 2009 में लड़ा था। इस बार मौका मुरादाबाद पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव का था। यहां से बसपा विधायक रहे राजीव चन्ना ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया था। इस उपचुनाव में भी भूपेंद्र सिंह को हार मिली थी। बसपा के बलराम सैनी विजयी रहे थे। इन दो चुनावों में हार के बाद भी भूपेंद्र सिंह संगठन में मजबूती के साथ उभरते रहे। संगठन में उनका प्रभाव निरंतर बढ़ता रहा।
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वर्ष 2016 में भूपेंद्र सिंह पहली बार एमएलसी बने। हाल भी उन्हें फिर एमएलसी बनाया गया। संगठन से सत्ता तक का सफर तय करते हुए वह पहली योगी सरकार में राज्य मंत्री और 2019 तथा 2022 में कैबिनेट मंत्री बने।