छजलैट के 14 साल पुराने प्रकरण में शनिवार को अदालत में आरोपियों की ओर से बचाव पक्ष में दो औरगवाह पेश हुए और उन्होंने बयान दर्ज कराए। इनसे पहले भी छह गवाह हुए थे। जिन्होंने ने घटना को गलत बताया था। वादी पक्ष की ओर से जिरह की गई । अदालत ने शेष साक्ष्य के लिए 24 नवंबर लगा दी है।
छजलैट थाने के सामने 29 जनवरी 2008 को पूर्व मंत्री और रामपुर के पूर्व विधायक आजम खां की कार को चेकिंग के लिए रोका गया था। जिसके बाद विवाद बढ़ गया था। आसपास के जनपदों से सपा के नेता मौके पर पहुंच गए थे। जिन पर आरोप लगा था कि इन्होंने आम जनता को उकसा कर सड़क जाम करते हुए बवाल किया था। इससे सरकारी कार्य मे बाधा उत्पन्न हुई थी। इस मुकदमे की सुनवाई एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट स्मिता गोस्वामी की अदालत में की जा रही है।
विशेष लोक अभियोजक मोहन लाल विश्नोई ने बताया कि शनिवार को इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह पेश हुए। अब तक बचाव पक्ष की ओर से आठ गवाह अदालत में पेश होकर गवाही दे चुके हैं। उन्होंने आरोपियों पर लगाए गए आरोप गलत बताए हैं, जिनसे जिरह पूरी की गई। मुकदमे अन्य आरोपी पूर्व विधायक हाजी इकराम कुरैशी, नूरपुर के पूर्व सपा विधायक नईम ऊल हसन, पूर्व महानगर अध्यक्ष राजकुमार प्रजापति, राजेश यादव, डी पी यादव अदालत में उपस्थित हुए। अनुपस्थित आजम खां और अब्दुल्ला आजम के स्थगन प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए अदालत ने शेष गवाह प्रस्तुत करने के लिए 24 नवंबर लगा दी है।