मैनाठेर थाना के महमूदपुर माफी निवासी सूखाराम ने 10 नवंबर 2017 को मुकदमा दर्ज कराया था। उसने बताया था कि उसके छोटे भाई नारायण सिंह (35) को उसकी पत्नी प्रेमवती 6 नवंबर से गायब बता रही है। जबकि प्रेमवती ने अपनी बहन के देवर राजकुमार निवासी बटुआ थाना असमोली जनपद संभल के साथ मिलकर नारायण सिंह का अपहरण किया है। 6 नवंबर को राजकुमार और उसके दो अन्य साथियों को प्रेमवती के घर बात करते देखा था।
पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज करते हुए मामले की तफ्तीश शुरू की। एक दिन बाद ही पुलिस ने नारायण सिंह की लाश गांगन नदी के पुल के पास बरामद कर ली। साथ ही नामजद प्रेमवती और राजकुमार को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया। जिन्होंने घटना को कबूल करते हुए पुलिस को बताया कि हम दोनों के बीच संबंध थे। नारायण को इसकी जानकारी हो गई थी। विरोध करने पर उन्होंने अपने एक अन्य साथी बनवारी उर्फ ऋषिपाल निवासी मंगूपुरा के साथ मिलकर नारायण सिंह की गला दबाकर हत्या कर दी थी। इसके बाद शव गांगन पुल के पास दबा दी थी। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या एक मोहम्मद फिरोज की अदालत में की गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक यादव ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपी प्रेमवती, उसके प्रेमी राजकुमार और बनवारी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
मैनाठेर थाना के महमूदपुर माफी निवासी सूखाराम ने 10 नवंबर 2017 को मुकदमा दर्ज कराया था। उसने बताया था कि उसके छोटे भाई नारायण सिंह (35) को उसकी पत्नी प्रेमवती 6 नवंबर से गायब बता रही है। जबकि प्रेमवती ने अपनी बहन के देवर राजकुमार निवासी बटुआ थाना असमोली जनपद संभल के साथ मिलकर नारायण सिंह का अपहरण किया है। 6 नवंबर को राजकुमार और उसके दो अन्य साथियों को प्रेमवती के घर बात करते देखा था। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज करते हुए मामले की तफ्तीश शुरू की। एक दिन बाद ही पुलिस ने नारायण सिंह की लाश गांगन नदी के पुल के पास बरामद कर ली।
साथ ही नामजद प्रेमवती और राजकुमार को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया। जिन्होंने घटना को कबूल करते हुए पुलिस को बताया कि हम दोनों के बीच संबंध थे। नारायण को इसकी जानकारी हो गई थी। विरोध करने पर उन्होंने अपने एक अन्य साथी बनवारी उर्फ ऋषिपाल निवासी मंगूपुरा के साथ मिलकर नारायण सिंह की गला दबाकर हत्या कर दी थी। इसके बाद शव गांगन पुल के पास दबा दी थी। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या एक मोहम्मद फिरोज की अदालत में की गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक यादव ने बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपी प्रेमवती, उसके प्रेमी राजकुमार और बनवारी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।