सात साल पुराने युवक के अपहरण के मामले में अदालत ने दो सगे भाई समेत तीन मुलजिमों को दोषी करार देते हुए दस-दस साल कैद की सजा सुनाई है। जबकि दो अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया गया है।
सात अक्तूबर 2015 को संभल कोतवाली में अकबर हुसैन ने मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उसने बताया था कि वह अपने बेटे और अन्य रिश्तेदारों के साथ संभल स्थित कचहरी अपने साढ़ू के बेटे की जमानत लेने गए थे। शाम करीब चार बजे जब वह कचहरी के बाहर निकले। तब ही मोहम्मद उमर, रफी, शाइन, आजम पुत्रगण अहमद निवासी चौधरी सराय संभल और आमिर पुत्र अनीस निवासी मौजपुर दिल्ली आ गए। आरोपी मेरे बेटे मोहम्मद शुएब को उठाकर ई रिक्शा से ले गए। इस मामले में पुलिस ने रात में ही आरोपियों के घर से मोहम्मद शुएब को घायल अवस्था में बरामद किया गया था। इसके अलावा पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम ज्ञानेन्द्र सिंह यादव की अदालत में की गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता कौशल कुमार गुप्ता ने बताया कि इस मामले में न सिर्फ पीड़ित के घरवालों ने बल्कि स्वतंत्र गवाहों ने भी घटना की पुष्टि की। आरोपी मोहम्मद उमर और मोहम्मद रफी के खिलाफ कोई ठोस गवाह नहीं होने के कारण दोनों को अदालत ने रिहा कर दिया। अन्य आरोपी शाइन, उनके भाई आजम तथा इनके रिश्तेदार आमिर को साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार दिया गया। जिन्हें दस-दस साल के कठोर कारावास के साथ प्रत्येक पर पांच- पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।