बारह साल पहले काफूरपुर रेलवे स्टेशन पर रेल ट्रैक जाम करने के वालों में शामिल रहे तीस आरोपियों को एमपी एमएलए स्पेशल सेशन कोर्ट ने अग्रिम जमानत पर रिहा किया है। आरोप है कि पांच मार्च 2011 से लेकर 19 मार्च तक रेलवे ट्रैक पर जाम लगाते हुए ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी थी। इस मुकदमे में सपा विधायक समरपाल सिंह आरोपी हैं। जिनके द्वारा अभी जमानत प्रार्थना पत्र अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
जीआरपी के गजरौला थाने में 11 मार्च 2011 को तत्कालीन स्टेशन अधीक्षक सरदार सिंह ने केस दर्ज कराया था। जिसमें उन्होंने बताया था कि कि पांच मार्च 2011 को सुबह करीब दस बजे काफूर पुर स्टेशन के सामने जाट समुदाय के आरक्षण को लेकर आदर्श किसान यूनियन जूनियर हाई स्कूल के मैदान में अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया था। जिसमें करीब दो तीन हजार लोग एकत्र हुए थे। य़ह लोग देखते देखते नारेबाजी करते हुए रेलवे ट्रैक पर आ गए। जब इन्हें वहां से हटाने का प्रयास किया गया, तब इन्होंने पथराव करने की धमकी दी और रेलवे लाइन पर अपने जानवर लाकर बांध दिए साथ। इस मामले में आरोपी कविता चौधरी को 18 अप्रैल 2017 को ही जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
इस मामले में अमरोहा जिले की नौगांवा सादात विधान सभा क्षेत्र सीट से विधायक समर पाल सिंह भी आरोपी हैं। जिन्हें अभी जमानत नहीं मिली है। मुकदमे के तीस आरोपी जिनमें अरुण कुमार सिरोही, राज पाल सिंह, भगत सिंह, रामवीर सिंह, तेजेंद्र सिंह, नानक सिंह, मनवीर सिंह, राहुल सिंह चिकारा, राहुल, धीरेंद्र सिंह, मेहर सिंह, धर्मेंद्र सिंह, शीश पाल, विजेंदर सिंह, यामीन खचेडू सिंह, अंक दीप सिंह, दिवाकर सिंह, हर पाल सिंह, अशोक कुमार, अरविंद कुमार, जसवंत सिंह, देश राज सिंह, रविन्द्र सिंह, प्रदीप कुमार, हुकुम सिंह, ओम प्रकाश, बाबू राम, यश पाल सिंह मलिक, विजय पाल सिंह तथा रिंकू सिंह द्वारा जनपद न्यायाधीश की अदालत में अग्रिम जमानत का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। जिसकी सुनवाई एमपी एमएलए स्पेशल सेशन कोर्ट पुनीत कुमार गुप्ता की अदालत में की गई। आरोपियों के अधिवक्ता अनुज विश्नोई उर्फ नीटू ने बताया कि अदालत ने बहस सुनने के बाद आरोपियों की अग्रिम जमानत स्वीकार कर ली है। इस मुकदमे में आरोपी बनाए गए विधायक समर पाल सिंह द्वारा अभी ज़मानत प्रार्थना पत्र अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया है।