मुरादाबाद। रामगंगा विहार स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में शुक्रवार को पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की आराधना की गई। सुबह श्रीजी का अभिषेक और शांति धारा हुई। इसमें श्रद्धालुओं ने परिवार सहित भाग लिया। आचार्य भद्रबाहु सागर ने उत्तम आर्जव धर्म की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ मन, वचन और कर्म में सरलता रखना है। व्यक्ति जैसा भीतर से हो, वैसा ही व्यवहार बाहर भी होना चाहिए। छल-कपट और दिखावे से दूर रहकर जीवन में निष्कपटता अपनाना ही आर्जव धर्म का संदेश है। महिला अध्यक्ष सुषमा जैन ने कहा कि जैन धर्म में उत्तम आर्जव धर्म का अर्थ छल-कपट, दिखावे और स्वार्थ से दूर रहना है। जहां मन, वचन और कर्म में एकरूपता होती है वहीं आर्जव धर्म की अनुभूति होती है। श्रीजी के अभिषेक और शांति धारा के पुण्यार्जक परिवारों में महिमा जैन, ऋतु जैन, पारिजात जैन, छवि जैन, यश वर्धन जैन, आशा जैन, धीरज जैन, नेहा जैन, नीरज जैन आदि शामिल हुए। इस मौके पर मंदिर अध्यक्ष संदीप जैन, मंत्री नीरज जैन, उपाध्यक्ष सजल, महिला अध्यक्ष सुषमा जैन, कोषाध्यक्ष रीमा जैन, छवि जैन, रुक्मिणी जैन, उषा जैन आदि मौजूद रहे।