कुंदरकी। शुक्रवार को शिया समुदाय ने जश्ने ईद ए गदीर का जुलूस निकाला। साथ ही मस्जिद में ईद ए गदीर की नमाज अदा की गई जिसके बाद एक दूसरे को मुबारकबाद भी दी गई। कुंदरकी नगर की मस्जिद ए सादात में मौलाना आफाक आलम जैदी ने ईद ए गदीर की नमाज अदा कराई और शुक्रवार की नमाज के बाद जश्ने ईद ए गदीर का हर्षोल्लास के साथ जुलूस निकाला जिसमें युवा नारे तकबीर अल्लाह हो अकबर, नारे रिसालत या रसूल अल्लाह, नारे हैदरी या अली के नारे लगा रहे थे। जुलूस के दौरान मौलाना आफाक आलम जैदी ने कहा कि इस्लामिक 18 जिल्हीज को पैगंबर ए इस्लाम ने अपने आखिरी हज करके वापस आ रहे थे तब पैगंबर ए इस्लाम ने गदीर के मैदान में सवा लाख हाजियों को तीन दिन तक वहीं रोका और फिर रसूल ए करीम ने ऊंटों के कजावे का मिंबर बनाकर उस पर खड़े होकर तवील खुतबा दिया और हजरत इमाम अली का हाथ अपने हाथ में लेकर बुलंद किया और फरमाया जिसका मैं मौला उसके मौला अली जिसको सुनकर गदीर के मैदान में जश्न का माहौल कायम हो गया था। हजरत अली को लोगों ने तीन दिन तक मुबारकबाद पेश की गई। मौलाना मुहम्मद नकी रिजवी और काशिफ काजमी ने भी ईद ए गदीर को लेकर बयान किया। जुलूस अपनी राहों से होता हुआ इमामबाड़ा हजरत अबुतालिब पर समाप्त हुआ। जुलूस मे बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग शामिल रहे। संचालन गुलाम मेहंदी नकवी ने किया। वहीं देर रात तक शिया समुदाय के इमामबाड़ों और अजाखानों में नूरानी महफिलें हुई। घर-घर पकवान बनाकर रसूल ए करीम और हजरत इमाम अली की नियाज दिलाई गई। युवाओं ने जगह जगह शरबत की सबील की और तबरूर्क वितरण किया।