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Moradabad News: विश्वविद्यालय के नए लेआउट पर कुलसचिव ने किए हस्ताक्षर

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मुरादाबाद।
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राज्य विश्वविद्यालय की चहारदीवारी के पिलर लगाने के बाद ले आउट को संशोधित किया गया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने संशोधित ले आउट की रिपोर्ट क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को भेजा था लेकिन उन्होंने हस्ताक्षर करने के इन्कार कर दिया। इसके बाद लोनिवि के अधिशासी अभियंता ने कुलसचिव को पत्र भेजकर संशोधित ले आउट पर हस्ताक्षर कराया। पीडब्ल्यूडी ने अब विभिन्न विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए काम शुरू दिया है।
रामगंगा पार हरदासपुर में गुरु जंभेश्वर राज्य विश्वविद्यालय की जमीन को घेरने के लिए पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने एक सप्ताह में चारों तरफ पिलर लगा दिए हैं। इसके बाद पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने पूरी जमीन का सर्वे कर संशोधित एवं फाइनल ले आउट तैयार किया। अधिशासी अभियंता आरबी सिंह का कहना है कि ले आउट की रिपोर्ट क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. संध्या रानी को भेजी गई। इस बारे में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी का कहना है कि वह सिर्फ यूनिवर्सिटी की जमीन खरीदने के लिए रिसीवर नियुक्त हैं। इसी कारण हस्ताक्षर नहीं किया। इस मामले की जानकारी मिलने के बाद अधिशासी अभियंता ने लेआउट के कागजात को रुहेलखंड विवि के प्रभारी कुलसचिव संजीव सिंह के पास भेज दिया। कुलसचिव ने तत्काल कागजात पर हस्ताक्षर कर उसे लोक निर्माण विभाग को भेज दिए। इसी आधार पर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ने पर्यावरण, वन विभाग, स्थानीय निकाय, अग्निशमन सहित अन्य विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने के लिए अनुरोध पत्र भेज दिया है। अभियंताओं का कहना है कि अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलते ही काम शुरू किया जाएगा। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के कारण थोड़ी देरी हुई है। विश्वविद्यालय के लिए 50 एकड़ की भूमि निर्धारित है। इसमें ढाई एकड़ जमीन चार किसानों की है। बाकी जमीन सरकारी है। शिक्षा विभाग ने एक किसान की जमीन की रजिस्ट्री करा ली है।
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ढाई हेक्टेयर पट्टे की जमीन फंसी

राज्य विश्वविद्यालय के निर्धारित की गई जमीन में से ढाई हेक्टेयर जमीन पट्टे पर दी गई है। डीएम अनुज सिंह ने बताया कि पट्टे को निरस्त कराने के लिए कोर्ट में विधिक कार्यवाही की जा रही है। विश्वविद्यालय निर्माण के लिए 47.5 एकड़ जमीन सरकारी है। इस कारण निर्माण में बाधा नहीं आएगी।
मेरठ की कंपनी करेगी निर्माण
पीडब्ल्यूडी ने राज्य विश्वविद्यालय के लिए 299 करोड़ का एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा था। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद 121.33 करोड़ का टेंडर पास हो गया। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता आरबी सिंह का कहना है कि डिजायन और अन्य कार्यों को जोड़ने पर फिलहाल लागत 169.58 करोड़ आ रही है। मेरठ की आरसीसी डेवलपर कंपनी विश्वविद्यालय का निर्माण करेगी। निर्माण के लिए डिजायन पीडब्ल्यूडी के नियोजन विभाग ने तैयार किया है।
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राज्य विश्वविद्यालय का निर्माण मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले कार्यों में है। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को शीघ्र कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। - आंजनेय कुमार सिंह, मंडलायुक्त
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