वहीं भाजपा नेता सरकार के इस निर्णय की तारीफ कर रहे हैं। वहीं पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर भी इस आदेश को लेकर बहस छिड़ी है। कई संगठनों भी इस फरमान पर विरोध जताया है तो कुछ संगठन शासन के इस निर्णय को सही ठहराने में जुटे हैं।
- सरकार का ये अच्छा निर्णय है। इसका सभी को स्वागत करना चाहिए। दुकानों पर नाम लिखने से लोगों को पता चल जाएगा कि दुकान किस व्यक्ति की है। वह वहां से खाने पीने का सामान लेना चाहता हैं तो ले सकता हैं। अगर उसका वहां से सामान खरीदने का मन नहीं है तो नहीं खरीदेगा। -
रितेश गुप्ता, नगर विधायक, भाजपा
- भाजपा उत्तर प्रदेश का माहौल खराब करना चाहती है, ताकि विधानसभा उपचुनाव में उसे लाभ मिल सके। हमारे देश के हिंदू मुस्लिम वर्षों से साथ खाते-पीते आ रहे हैं। सरकार उनके बीच नफरत फैलाना चाहती है, लेकिन सरकार अपने मकसद में कामयाब नहीं होगी। हिंदू की दुकान पर मुस्लिम काम करते हैं और मुस्लिम की दुकान पर हिंदू काम करते हैं। ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तरह की घटनाएं हो रही हैं। दो समुदायों के बीच खाई पैदा की जा रही है।
- डॉ. एसटी हसन, पूर्व सांसद, सपा
- दुकानों के बाहर मालिक का नाम लिखना विशेष समुदाय के प्रति साजिश का हिस्सा है। कांवड़ मार्ग पर सभी समुदायों के लोग कांवड़ियों का स्वागत करते हैं। लॉक डाउन में सड़कों पर चल रहे लोगों की मदद के लिए किसी ने नाम नहीं पूछा। लोकसभा चुनाव में भाजपा को हार मिली तो अधिकारी जनहित के निर्णय न लेकर भाजपा हित में काम कर रही है।
-फिरासत हुसैन गामा, प्रदेश सचिव, सपा
- कांवड़ यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था चाक चौक रहेगी। मार्गाें का निरीक्षण किया जा रहा है। जहां जरूरत लगेगी सरकार के आदेश का पालन कराया जाएगा।
सतपाल अंतिल, एसएसपी